फोटो- नवभारत डिजाइन 
देश

बिहार, हरियाणा और ओडिशा में 'सियासी खेला' होने का डर, क्या आज बदल जाएंगे सारे समीकरण?

Rajya Sabha Election 2026: तीन राज्यों की 11 राज्यसभा सीटों के लिए आज मतदान होने जा रहा है। बिहार, हरियाणा और ओडिशा में क्रॉस-वोटिंग और जोड़-तोड़ की आशंकाओं ने इस मुकाबले को रोमांचक बना दिया है।

प्रतीक पाण्डेय

Rajya Sabha Chunav 2026: आज 16 मार्च की सुबह भारतीय राजनीति के लिए बेहद गहमागहमी भरी रही है, क्योंकि देश के तीन राज्यों- बिहार, हरियाणा और ओडिशा की कुल 11 राज्यसभा सीटों पर वोटिंग शुरू ही होने वाली है। यह चुनाव केवल संसद के ऊपरी सदन की सदस्यता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय दलों की एकजुटता और राष्ट्रीय गठबंधनों की ताकत का भी लिटमस टेस्ट है।

सुबह से ही विधानसभा परिसरों में नेताओं के बीच रणनीतिक गुफ्तगू ने यह साफ कर दिया है कि परिणाम चौंकाने वाले भी हो सकते हैं। जहां कुछ उम्मीदवारों की राह बेहद आसान नजर आ रही है, वहीं कुछ सीटों पर पेंच इस कदर फंसा है कि अंत तक कुछ भी कहना मुश्किल है।

क्या कुशवाहा काट पाएंगे ओवैसी का दांव?

बिहार की राजनीति में पांच सीटों के लिए 6 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसने मुकाबले को 'नंबर गेम' में बदल दिया है। एनडीए की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर, नितिन नबीन और शिवेश कुमार की जीत तो पक्की मानी जा रही है, लेकिन असली लड़ाई पांचवीं सीट के लिए उपेंद्र कुशवाहा और आरजेडी के अमरेंद्र धारी सिंह के बीच छिड़ी है। बिहार में एक सीट जीतने के लिए 41 विधायकों के समर्थन की जरूरत है।

एनडीए के पास अपने 202 विधायक हैं, लेकिन कुशवाहा को अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त वोटों की दरकार है। इस बीच, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के पांच विधायकों और बसपा के रुख ने महागठबंधन की रणनीति को काफी उलझा दिया है। सबकी नजर इस बात पर है कि क्या तेजस्वी यादव के उम्मीदवार विपक्षी एकजुटता के दम पर बाजी मार पाएंगे या एनडीए सेंधमारी में कामयाब होगी।

ओडिशा का हाल क्या है?

ओडिशा की चार राज्यसभा सीटों पर भी आज जबरदस्त खींचतान देखने को मिल रही है, जहां 5 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। भाजपा के मनमोहन सामल और सुजीत कुमार के साथ-साथ बीजेडी के संतृप्त मिश्रा की जीत लगभग तय मानी जा रही है। विवाद की स्थिति तब पैदा हुई जब भाजपा ने संतृप्त मिश्रा पर अपने हलफनामे में जानकारी छिपाने का आरोप लगाया।

हालांकि, असली मुकाबला चौथी सीट के लिए भाजपा समर्थित दिलीप रे और कांग्रेस के समर्पित उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर मिश्रा के बीच है। भाजपा के पास 82 विधायकों का समर्थन है, लेकिन उन्हें अपने तीसरे उम्मीदवार को जिताने के लिए 8 अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। दूसरी ओर, बीजेडी और कांग्रेस मिलकर इस सीट को निकालने की कोशिश में हैं, लेकिन कांग्रेस को अपने ही खेमे में क्रॉस-वोटिंग का गहरा डर सता रहा है।

हरियाणा में क्या एकजुट रहेगी कांग्रेस?

हरियाणा की दो सीटों पर हो रहे चुनाव ने भी देश का ध्यान खींचा है, क्योंकि यहां भी निर्धारित संख्या से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं। भाजपा के संजय भाटिया की जीत तय है, लेकिन दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल के बीच कांटे की टक्कर है। हरियाणा में एक सीट के लिए 31 वोटों की आवश्यकता है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, जो जीत के लिए पर्याप्त हैं, लेकिन पार्टी को डर है कि उसके कुछ नाराज विधायक पाला बदल सकते हैं।

इसी 'डर' के चलते कांग्रेस ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए शिमला के रिजॉर्ट में भेज दिया था। आज शाम तक यह साफ हो जाएगा कि क्या हुड्डा और विनेश फोगाट जैसे दिग्गज अपनी पार्टी के उम्मीदवार को सुरक्षित निकाल पाते हैं या निर्दलीय उम्मीदवार बाजी पलट देते हैं।

धीरेंद्र शास्त्री के खिलाफ FIR दर्ज, पप्पू यादव की निकली भड़ास; कहा- माफ नहीं करेंगे

हेमंत का राहुल गांधी पर वार: बोले- खड़गे के बरामदे में ही पीएम बन सकते हैं राहुल, मॉक पार्लियामेंट पर कसा तंज!

How To File Online FIR: पुलिस स्टेशन गए बिना ऑनलाइन FIR कैसे दर्ज करें? जानें Step By Step पूरा प्रोसेस

प्रदर्शन के नाम पर कब्जा नहीं कर सकते...जंतर-मंतर प्रोटेस्ट पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- तय हो समय और जगह

PIB Fact Check: क्या सच में PM मोदी दे रहे सभी को 8,000 रुपए का दिवाली बोनस, जानें इसके पीछे का खेला