Rajiv Gandhi Birth Anniversary: भारत एक प्राचीन देश है, लेकिन एक युवा राष्ट्र भी है। मैं जवान हूं और मेरा भी एक सपना है। मेरा सपना है कि भारत मजबूत, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बने, दुनिया के सभी देशों में प्रथम स्थान पर पहुंचे और मानव जाति की सेवा करे। ये शब्द भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्रियों में से एक राजीव गांधी के थे। उन्होंने भारत को आधुनिक और तकनीकी रूप से मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उनके योगदान के कारण उन्हें भारत में ‘सूचना प्रौद्योगिकी का जनक’ भी कहा जाता है। हर साल 20 अगस्त को उनकी जयंती ‘सद्भावना दिवस’ के रूप में मनाई जाती है।
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। वे केवल तीन साल के थे, जब 1947 में भारत आजाद हुआ और उनके नाना जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। बाद में उनके माता-पिता लखनऊ से नई दिल्ली आकर रहने लगे। उन्होंने अपने बचपन का काफी समय अपने नाना जवाहरलाल नेहरू के साथ तीन मूर्ति हाउस में बिताया। उस समय उनकी मां इंदिरा गांधी भी प्रधानमंत्री आवास पर रहती थीं और नेहरू के काम में उनकी मदद करती थीं।
राजीव गांधी कुछ समय तक देहरादून के वेल्हम स्कूल में पढ़े। इसके बाद उन्हें हिमालय की तलहटी में स्थित दून स्कूल भेज दिया गया। यहां उनकी कई लोगों से दोस्ती हुई, जो जीवनभर बनी रही। बाद में उनके छोटे भाई संजय गांधी भी दून स्कूल में पढ़ने आए और दोनों भाई कुछ समय तक साथ रहे।
स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद राजीव गांधी कैम्ब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज गए। बाद में उन्होंने लंदन के इंपीरियल कॉलेज में पढ़ाई की। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। राजीव गांधी की राजनीति में कोई खास रुचि नहीं थी। उनके साथ पढ़ने वाले लोगों के अनुसार, उन्हें राजनीति, इतिहास और दर्शन की किताबों से ज्यादा विज्ञान और इंजीनियरिंग की किताबें पसंद थीं।
उन्हें संगीत में भी काफी रुचि थी। वे पश्चिमी संगीत के साथ-साथ हिंदुस्तानी शास्त्रीय और आधुनिक संगीत भी सुनते थे। उन्हें फोटोग्राफी और रेडियो सुनने का भी शौक था। लेकिन उनका सबसे बड़ा जुनून हवाई जहाज उड़ाना था। इंग्लैंड से भारत लौटने के बाद उन्होंने दिल्ली फ्लाइंग क्लब की परीक्षा पास की और कमर्शियल पायलट का लाइसेंस हासिल किया। इसके बाद वे इंडियन एयरलाइंस में पायलट के रूप में काम करने लगे।
राजनीति से दूर रहने के बावजूद राजीव गांधी का परिवार राजनीति में सक्रिय था। लेकिन राजीव अपना निजी जीवन जीना चाहते थे। वर्ष 1980 में एक विमान दुर्घटना में उनके छोटे भाई संजय गांधी की मौत हो गई। इस घटना के बाद उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया।
संजय गांधी की मृत्यु के बाद राजीव गांधी पर राजनीति में आने और अपनी मां इंदिरा गांधी की मदद करने का दबाव बढ़ने लगा। शुरुआत में उन्होंने राजनीति में आने से इनकार किया, लेकिन बाद में वे इसके लिए तैयार हो गए। उन्होंने अपने भाई संजय गांधी की मृत्यु के बाद खाली हुई उत्तर प्रदेश की अमेठी लोकसभा सीट से उपचुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद वे सक्रिय राजनीति में आ गए।
31 अक्टूबर 1984 को उनकी मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई। इस दुखद घटना के बाद राजीव गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बने और उसी दिन भारत के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। उस समय राजीव गांधी की उम्र केवल 40 वर्ष थी। इतने बड़े दुख के बावजूद उन्होंने खुद को संभाला और देश की जिम्मेदारी निभाई।
इसके बाद लोकसभा के चुनाव हुए। इन चुनावों में कांग्रेस को ऐतिहासिक जीत मिली। कांग्रेस ने 508 में से 401 सीटें जीतकर भारी बहुमत हासिल किया। यह उस समय पार्टी की सबसे बड़ी चुनावी जीतों में से एक थी। राजीव गांधी के लिए यह बहुत कठिन समय था। वे एक ऐसे राजनीतिक परिवार से आते थे, जिसकी कई पीढ़ियां देश की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुकी थीं। इसके बावजूद उन्होंने राजनीति में देर से कदम रखा था और कभी इसे अपना करियर नहीं बनाना चाहते थे।
1984 के चुनाव अभियान के दौरान राजीव गांधी ने देश के अलग-अलग हिस्सों की यात्रा की। उन्होंने एक महीने के लंबे अभियान में 250 से अधिक सभाएं कीं और लाखों लोगों से सीधे मुलाकात की। उन्होंने देश के विकास और युवाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। वे चाहते थे कि भारत आधुनिक तकनीक को अपनाए और दुनिया के विकसित देशों के साथ कदम से कदम मिलाकर चले।
राजीव गांधी आधुनिक सोच रखने वाले नेता थे। वे भारत को नई तकनीक से जोड़ना चाहते थे। उनका मानना था कि देश को आगे बढ़ाने के लिए विज्ञान और तकनीक का इस्तेमाल जरूरी है। उन्होंने कंप्यूटर, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया। उनके कार्यकाल में तकनीकी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बदलावों की शुरुआत हुई। वे भारत को 21वीं सदी के लिए तैयार करना चाहते थे।
वे अक्सर भारत की एकता और विकास की बात करते थे। उनका सपना था कि भारत मजबूत, आत्मनिर्भर और आधुनिक देश बने। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस तरह एक घटना ने उन्हें राजनीति में आने के लिए मजबूर किया था, उसी तरह एक दूसरी घटना ने उनके जीवन का अंत कर दिया।
21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरुमबुदुर में एक चुनावी सभा के दौरान राजीव गांधी की हत्या कर दी गई। उस समय वे लोकसभा चुनाव के प्रचार के लिए वहां पहुंचे थे। 20 मई को वे दिल्ली स्थित अपने निवास 10 जनपथ से चुनाव प्रचार के लिए निकले थे। उन्हें भुवनेश्वर और विशाखापट्टनम होते हुए श्रीपेरुमबुदुर पहुंचना था। 21 मई की शाम उनकी सभा आयोजित की गई थी। यह उनकी आखिरी चुनावी यात्रा थी और दुर्भाग्य से उनके जीवन का आखिरी सफर भी साबित हुआ।
राजीव गांधी की हत्या की साजिश श्रीलंका के अलगाववादी संगठन लिट्टे (LTTE) से जुड़े लोगों ने रची थी। जांच के अनुसार, इस साजिश को अंजाम देने के लिए शिवरासन को जिम्मेदारी दी गई थी। उसके साथ धनु और शुभा सहित कई अन्य लोग भी इस साजिश में शामिल थे। 21 मई की शाम श्रीपेरुमबुदुर में राजीव गांधी चुनावी सभा में पहुंचे। वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। लोग उनका स्वागत कर रहे थे और उनके समर्थन में नारे लगा रहे थे।
इसी दौरान धनु नाम की महिला राजीव गांधी के पास पहुंची। उसने उन्हें चंदन की माला पहनाई और उनके पैर छूने के लिए झुकी। इसी दौरान उसने अपने शरीर पर बंधे विस्फोटक को सक्रिय कर दिया। इस विस्फोट में राजीव गांधी सहित 16 लोगों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया। हत्या की जांच सीबीआई को सौंपी गई। जांच के बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और साजिश में शामिल लोगों की पहचान की गई। जांच में लिट्टे की भूमिका सामने आई।
राजीव गांधी का जीवन बहुत लंबा नहीं था, लेकिन उन्होंने कम समय में भारत के विकास की एक नई दिशा तय करने की कोशिश की। वे चाहते थे कि भारत आधुनिक तकनीक अपनाए, आत्मनिर्भर बने और 21वीं सदी में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल हो।
20 अगस्त को उनकी जयंती के अवसर पर उन्हें याद करते हुए ‘सद्भावना दिवस’ मनाया जाता है। उनके जीवन और विचारों को याद करने का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भारत को मजबूत, आधुनिक, आत्मनिर्भर और मानवता की सेवा करने वाला देश बनाने का सपना लगातार आगे बढ़ाया जाए।