शिक्षकों को सम्मानित करतीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (सोर्स: एक्स@rashtrapatibhvn) 
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दिल्ली में महाराष्ट्र के 6 टीचर हुए सम्मानित, राष्ट्रपति ने देशभर के 81 शिक्षकों को दिया पुरस्कार

Teacher's Day: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शिक्षक दिवस के अवसर पर देशभर के 81 शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इस दौरान महाराष्ट्र के 6 शिक्षक भी नवाज़े गए।

आकाश मसने

81 Teachers Received National Teacher Award: नई दिल्ली में शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महाराष्ट्र के छह शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया है। इन शिक्षकों ने अपने उत्कृष्ट योगदान से शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुआ है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश के 81 शिक्षकों को उनकी अनूठी शिक्षण पद्धतियों के लिए इस वर्ष के राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया। इन अनूठी शिक्षण पद्धतियों में ताड़ के पत्ते की पांडुलिपियां बनाने से लेकर, तंत्रिका मनोविज्ञान प्रयोगशाला की स्थापना, भारतीय ज्ञान प्रणालियों के साथ रंगमंच अध्ययन को एकीकृत करने, महिला सुरक्षा ऐप विकसित करने से लेकर कठपुतली शो तक शामिल हैं।

देश भर के 81 शिक्षक सम्मानित

राष्ट्रपति ने शिक्षक दिवस के मौके पर विज्ञान भवन में आयोजित एक समारोह में शिक्षकों को ये पुरस्कार प्रदान किए। ओडिशा के बसंत कुमार राणा, लक्षद्वीप के इब्राहिम एस, छत्तीसगढ़ के संतोष कुमार चौरसिया समेत 81 शिक्षकों को सम्मानित किया गया है।

इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि शिक्षकों का योगदान भारत को एक सुपर पॉवर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा कि शिक्षक छात्रों में आत्मसम्मान और सुरक्षा की भावना जगाते हैं। उनका यश ही शिक्षकों का सच्चा पुरस्कार है।

प्रमाणपत्र, पदक और 50 हजार रुपये का पुरस्कार

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षा को आनंददायक बनाने और बालिका शिक्षा को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। राष्ट्रपति ने सभी पुरस्कार विजेता शिक्षकों को प्रमाणपत्र, पदक और 50 हजार रुपये का पुरस्कार प्रदान किया। यह पुरस्कार शिक्षकों के समर्पण, नवाचार और छात्रों के जीवन को बेहतर बनाने के उनके प्रयासों को मान्यता देने के लिए दिया जाता है।

महाराष्ट्र के 6 शिक्षक हुए सम्मानित

  1. डॉ. शेख मोहम्मद वक्रिउद्दीन शेख हमीदोद्दीन (जिला परिषद हायस्कूल, अर्धापूर, नांदेड): डॉ. शेख ने ग्रामीण क्षेत्र में अल्पसंख्यक लड़कियों की शिक्षा के लिए विशेष प्रयास किए और 'सुरक्षित शिक्षा तुम्हारे द्वार' कार्यक्रम के तहत कई स्कूल शुरू किए।
  2. सोनिया विकास कपूर (एटॉमिक एनर्जी सेंट्रल स्कूल नं. 2, मुंबई): मुख्याध्यापिका सोनिया कपूर ने सहकारी शिक्षण और आईसीटी के उपयोग को प्रोत्साहित किया और छात्रों के जीवन कौशल और मूल्यों को मजबूत करने पर जोर दिया।
  3. डॉ. संदीपन जगदाले (दयानंद कॉलेज ऑफ आर्ट्स, लातूर): संगीत के प्राध्यापक डॉ. जगदाले ने गोंड आदिवासी वस्तियों में शिक्षा पहुंचाई। एचआईवी ग्रस्त छात्रों के शैक्षणिक पालकत्व को स्वीकारा।
  4. डॉ. नीलाक्षी जैन (शाह एंड अंकर कच्छी अभियांत्रिकी महाविद्यालय, मुंबई): डॉ. जैन ने अभियांत्रिकी शिक्षा में नवाचारी दृष्टिकोण और शोध के लिए विशेष योगदान दिया।
  5. प्रो. पुरुषोत्तम पवार (एस व्ही पी एम इनस्टट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी एंड इंजिनीअरिंग, बारामती): प्रो. पवार ने ग्रामीण क्षेत्र के छात्रों में प्रौद्योगिकी के प्रति जागरूकता और कौशल विकास के लिए विशेष प्रयास किए और उद्योजकता को प्रोत्साहित किया।
  6. अनिल जिभकाटे (संत जगनाडे महाराज शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था, नागपुर): जिभकाटे ने नई पीढ़ी को व्यावसायिक कौशल, शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने के लिए उल्लेखनीय प्रयास किए। 700 से अधिक शैक्षिक सत्र आयोजित किये।

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