राज्यसभा में राघव चड्ढा (सोर्स- सोशल मीडिया) 
देश

राघव चड्ढा ने संसद में कर दी ऐसी मांग...जिससे उड़ गए सभी सांसदों के होश, 'राइट टू रिकॉल' आया तो क्या होगा?

Raghav Chaddha: AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने सदन में राइट टू रिकॉल का मुद्दा उठाया। यह एक ऐसा सिस्टम है जिसमें वोटर को अपने चुने हुए जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार होता है।

अभिषेक सिंह

Right to Recall: आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने बुधवार को सदन में राइट टू रिकॉल (RTR) का मुद्दा उठाया। यह एक ऐसा सिस्टम है जिसमें वोटर्स को अपने चुने हुए जनप्रतिनिधि को वापस बुलाने का अधिकार होता है। चड्ढा ने तर्क दिया कि अगर कोई चुना हुआ सांसद या विधायक अपने काम से वोटर्स को खुश नहीं कर पाता है, तो उन्हें पद से हटाने का अधिकार होना चाहिए।

राघव चड्ढा ने कहा कि राइट टू रिकॉल 24 देशों में है। उन्होंने कहा कि राजस्थान और कर्नाटक जैसे कुछ भारतीय राज्यों में पंचायत लेवल पर भी यह सिस्टम है। जिससे वोटर्स जनप्रतिनिधियों को वापस बुला सकते हैं अगर उनका काम ठीक नहीं है।

राइट टू रिकॉल आया तो क्या होगा?

राघव चड्ढा के मुताबिक, राइट टू रिकॉल वोटर्स के लिए एक इंश्योरेंस सिस्टम की तरह काम करेगा, जिससे उन्हें यह सुरक्षा मिलेगी कि अगर उनके रिप्रेजेंटेटिव चुनाव जीतने के बाद उन्हें भूल जाते हैं या अपने इलाके को नजरअंदाज करते हैं, तो वोटर्स उनका मैंडेट रद्द कर सकते हैं। हालांकि, सदन के ज्यादातर सदस्य उनके तर्कों से सहमत नहीं दिखे।

क्यों मिलना चाहिए RTR का अधिकार?

आप सांसद ने तर्क दिया कि अगर संविधान में प्रेसिडेंट और वाइस प्रेसिडेंट समेत संवैधानिक अधिकारियों को उनके वोटर्स द्वारा हटाने का प्रावधान है तो लोगों को अपने चुने हुए रिप्रेजेंटेटिव को वापस बुलाने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए? उन्होंने तर्क दिया कि राइट टू रिकॉल तभी लाया जाना चाहिए जब किसी प्रतिनिधि के चुनाव क्षेत्र के कुल वोटरों में से 50 प्रतिशत लोग राइट टू रिकॉल का इस्तेमाल करते हों।

किन 24 देशों में है राइट टू रिकॉल?

क्रम संख्या देश का नाम किस स्तर पर  है प्रावधान
1 अमेरिका कुछ राज्यों और स्थानीय (स्टेट व लोकल) स्तर पर
2 कनाडा ब्रिटिश कोलंबिया में प्रांतीय स्तर पर
3 स्विट्जरलैंड कुछ कैंटन (प्रांतों) में
4 फिलीपींस स्थानीय स्तर पर
5 ताइवान विधायक, मेयर, कुछ शर्तों पर राष्ट्रपति
6 जापान स्थानीय और विधायिका स्तर पर
7 साउथ कोरिया स्थानीय स्तर पर
8 अर्जेंटीना कुछ राज्यों और नगर पालिकाओं में
9 लातविया संसदीय व्यवस्था में
10 स्लोवाकिया राष्ट्रपति के लिए रेफरेंडम रिकॉल
11 रोमानिया राष्ट्रपति के लिए रेफरेंडम रिकॉल
12 पोलैंड स्थानीय स्तर पर
13 सर्बिया स्थानीय स्तर पर
14 यूक्रेन स्थानीय स्तर पर
15 वेनेजुएला राष्ट्रपति समेत
16 बोलीविया राष्ट्रपति शामिल
17 इक्वाडोर राष्ट्रपति और स्थानीय स्तर पर
18 पेरू स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर
19 कोलंबिया मेयर और गवर्नर के लिए
20 पनामा विधायक स्तर पर
21 मेक्सिको राष्ट्रपति और राज्य स्तर पर
22 रूस स्थानीय और क्षेत्रीय स्तर पर
23 भारत कुछ राज्यों में स्थानीय निकायों में
24 नेपाल स्थानीय निकाय स्तर पर

ऊपर दी गई टेबल को देखकर आपको पता चल गया होगा कि  दुनिया के जिन 24 देशों में राइट टू रिकॉल सिस्टम है, वहां यह एक जैसा लागू नहीं होता है। कुछ देशों में यह सिस्टम राष्ट्रपति पर भी लागू होता है, जबकि कुछ में यह सांसदों को हटाने की भी इजाज़त देता है। हालांकि, ज्यादातर देशों में यह सिस्टम लोकल बॉडी और पंचायतों तक ही सीमित है, जिसमें भारत के कुछ राज्य भी शामिल हैं।

आज की ताजा खबर 16 अगस्त LIVE: एक क्लिक में पढ़ें दिनभर की सारी बड़ी खबरें

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में मीडिया की नो एंट्री! फोटो-वीडियो पर भी लगा बैन, नियम तोड़ने पर होगी कार्रवाई

आचार्य प्रमोद कृष्णम का कांग्रेस पर बड़ा हमला, बोले- राहुल गांधी पाकिस्तान के राष्ट्रपति जैसे

Tamil Nadu NEET Protest: विधानसभा के नए प्रस्ताव के बावजूद चेन्नई में NEET के खिलाफ प्रदर्शन जारी

JPSC-JSSC पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का फूटा गुस्सा, हेमंत सोरेन के साथ राहुल-तेजस्वी का भी फूंका पुतला