पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम (सोर्स- सोशल मीडिया) 
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ट्रंप ने टैरिफ को बनाया हथियार...अमेरिकी टैरिफ पर भड़के पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम, सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

Trump Tariffs: पी चिदंबरम ने डोनाल्ड ट्रंप पर टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि इससे व्यापार तथा भारत के निर्यात को नुकसान हुआ।

अक्षय साहू

P. Chidambaram on Trump Tariff: पूर्व वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने शनिवार को डोनाल्ड ट्रंप पर ‘टैरिफ को हथियार की तरह इस्तेमाल’ करने का आरोप लगाया और कहा कि इस कदम की निंदा होनी चाहिए। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात पर हैरानी नहीं है कि दो अप्रैल 2025 को घोषित तथाकथित पारस्परिक टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए जाने के बाद ट्रंप फिर से टैरिफ लगाने के नए रास्ते तलाश रहे हैं।

चिदंबरम ने यह भी कहा कि चौंकाने वाली बात यह है कि कुछ टिप्पणीकार और बीजेपी समर्थक ट्रोल किसी न किसी रूप में टैरिफ को जारी रखने के लिए ट्रंप के कदमों को परोक्ष रूप से सही ठहराने की कोशिश कर रहे हैं।

टैरिफ से वैश्विक व्यापार गंभीर रूप से प्रभावित

उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन लोगों को इस बात का एहसास है कि टैरिफ ने वैश्विक व्यापार को गंभीर रूप से प्रभावित किया है और यह नियम-आधारित व्यापार व्यवस्था के खिलाफ है, जिसकी अपेक्षा सभी देश करते हैं। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या उन्हें पता है कि इन टैरिफ का असर अमेरिका को होने वाले भारत के निर्यात पर भी पड़ा है। कांग्रेस नेता ने कहा कि ट्रंप की कार्रवाइयों को दुनिया के कई देशों ने ‘टैरिफ का हथियार के रूप में इस्तेमाल’ बताया है। उनका कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रंप अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत जो कदम उठाने की कोशिश कर रहे हैं, वह भी उसी प्रवृत्ति का हिस्सा है और इसकी भी आलोचना की जानी चाहिए। ट्रंप की हालिया टिप्पणियों का हवाला देते हुए चिदंबरम ने केंद्र सरकार के “संतुलित समझौते” के दावों पर भी सवाल उठाए।

पहले भी उठाए थे सवाल

इससे पहले भी चिदंबरम भारत-अमेरिका समझौते पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने इसे पूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौता मानने से इनकार करते हुए केवल एक “अंतरिम समझौता” बताया। एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना उचित नहीं है।

उनके अनुसार, संयुक्त बयान से स्पष्ट है कि यह समझौता मुख्य रूप से अमेरिका के हितों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है और भारत को इससे कोई विशेष लाभ नहीं मिला है। उन्होंने इसे भविष्य में संभावित अंतिम समझौते की दिशा में एक प्रारंभिक ढांचा भर बताया। 

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