लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (डिजाइन फोटो) 
देश

ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव: 118 विपक्षी सांसदों ने किए साइन, चौथी बार होगा फेल या रचा जाएगा इतिहास?

Parliament Budget Session: विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है, उनके खिलाफ 118 सांसद एकजुट हैं। इससे पहले भी तीन स्पीकर्स के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव आ चुका है।

अभिषेक सिंह

No Confidence Motion Against Om Birla: विपक्ष लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया है। स्पीकर के खिलाफ 118 सांसद एकजुट हैं। मंगलवार को कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की अगुवाई में लोकसभा सचिवालय को प्रस्ताव का नोटिस दिया गया। ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी इस प्रस्ताव में विपक्ष के साथ नहीं है।

लोकसभा में कांग्रेस के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई कांग्रेस चीफ व्हिप कोडिकुन्निल सुरेश, सांसद मोहम्मद जावेद और अन्य ने यह नोटिस लोकसभा सचिवालय को दिया। नोटिस देने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ने सचिवालय को अविश्वास प्रस्ताव की जांच करने और प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया।

नोटिस पर 118 सांसदों ने किए साइन

इस नोटिस पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और कई दूसरी विपक्षी पार्टियों के 118 सांसदों ने साइन किए हैं। प्रस्ताव से जुड़ा यह नोटिस संविधान के आर्टिकल 94(c) के तहत लोकसभा सेक्रेटेरिएट को दिया गया है। अब लोकसभा सचिवालय अविश्वास प्रस्ताव की तारीख तय करेगा।

विपक्ष क्यों लाया अविश्वास प्रस्ताव?

संसद के बजट सत्र के दौरान 2 फरवरी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी को पूर्व आर्मी चीफ एमएम नरवणे के अप्रकाशित मेमोयर का जिक्र किया। जिसके बाद सत्ता पक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि किसी अप्रकाशित किताब पर सदन में चर्चा नहीं हो सकती।

राहुल गांधी को बोलने से रोका!

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी नियमों का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर बोलने से रोक दिया। ओम बिरला ने राहुल गांधी को कहा कि आप राष्ट्रपति के अभिभाषण से जुड़े किसी अन्य मुद्दे पर बोल सकते हैं। लेकिन राहुल गांधी भी अपनी जिद पर अड़े रहे और बोलने से इनकार कर दिया। और राहुल गांधी का भाषण सदन की कार्यवाही से हटा दिया।

8 विपक्षी सांसदों को किया सस्पेंड

स्पीकर ओम बिरला ने अन्य विपक्षी सांसदों को बोलने का मौका दिया तो उन्होंने भी विरोध दर्ज कराते हुए बोलने से इनकार कर दिया। इस दौरान जमकर हंगामा भी हुआ। आसन की तरफ कागज उछाले गए। जिसके चलते आठ विपक्षी सांसदों सस्पेंड कर दिया गया। इस गतिरोध को लेकर विपक्ष का आरोप है कि विपक्षी नेताओं को लोकसभा में बोलने नहीं दिया जाता, जबकि सत्ता में बैठे लोगों को पूरी छूट दी जाती है।

इससे पहले आ चुके हैं तीन प्रस्ताव

  • पहला प्रस्ताव: 18 दिसंबर 1954 को तत्कालीन स्पीकर जीवी मावलंकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाया गया था, जिसे बहस के बाद रिजेक्ट कर दिया गया था।
  • दूसरा प्रस्ताव: 24 नवंबर 1966 को स्पीकर हुकम सिंह के खिलाफ मोशन लाया गया था। हालांकि, 50 से कम सदस्यों ने इसका समर्थन किया, इसलिए मोशन गिर गया।
  • तीसरा प्रस्ताव: 15 अप्रैल 1987 को उस समय के लोकसभा स्पीकर बलराम झाखड़ के खिलाफ मोशन लाया गया था। इसे भी बहस के बाद रिजेक्ट कर दिया गया था।

क्या है स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया?

स्पीकर को हटाने के लिए संविधान के आर्टिकल 94 और लोकसभा में प्रोसीजर और बिजनेस के नियमों के आर्टिकल 200 का पालन किया जाता है। ऐसे मोशन को पास करने के लिए, स्पीकर के खिलाफ लगाए गए आरोपों को साफ-साफ बताते हुए एक मोशन पेश किया जाता है। इसमें व्यंग्य या अंदाज़े की कोई गुंजाइश नहीं होती। फिर नोटिस को रूल 1 के तहत बिजनेस की लिस्ट में लिस्ट किया जाता है।

लोकसभा सचिवालय मोशन पेश करने की तारीख तय करता है। नोटिस मिलने के 14 दिनों के अंदर तारीख तय होनी चाहिए। मोशन को कम से कम 50 सदस्यों का सपोर्ट मिलना चाहिए। इसके साथ ही स्पीकर को तभी हटाया जा सकता है जब लोकसभा में मोशन बहुमत से पास हो जाए।

तिरंगे का सफर: एक झंडा, 120 साल की कहानी, 1906 से 1947 तक ऐसे बदला भारत का राष्ट्रीय ध्वज...

आज की ताजा खबर 16 अगस्त LIVE: वाराणसी एयरपोर्ट पर चली गोलियां; बंगाल में आशीष बनर्जी ने की आत्महत्या

NEET Paper Leak Student Protest: राहुल गांधी बोले- युवाओं का साहस काबिल-ए-तारीफ, सत्ता से जवाब मांगना उनका हक

भूख हड़ताल पर बैठे पप्पू यादव, 70वीं BPSC परीक्षा रद्द करने की मांग पर अड़े सांसद, बिहार बंद की दी चेतावनी

दिमागी नक्सल कौन? किरेन रिजिजू ने बताई इसकी परिभाषा, ये तीन इरादे रखने वालों पर निशाना