पीएम मोदी व अमित शाह (डिजाइन फोटो) 
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बिहार को दिया धोखा...अब असम-बंगाल में ढूंढ रहे मौका? हैरान कर देगी BJP के 'मास्टरस्ट्रोक' की असलियत

Indian Politics: नए साल के पहले दिन मोदी सरकार ने गुवाहाटी और कोलकाता के बीच देश की पहली वंदेभारत स्लीपर ट्रेन चलाने का ऐलान किया है। इसे बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक करार दिया जा रहा है।

अभिषेक सिंह

Vande Bharat Sleeper Train: नए साल के पहले दिन मोदी सरकार ने एक बड़ा ऐलान किया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन जल्द ही गुवाहाटी और कोलकाता के बीच शुरू की जाएगी। यह ट्रेन पश्चिम बंगाल और असम के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगी।

केन्द्र की बीजेपी सरकार यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब इस साल मार्च-अप्रैल में दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इस कदम मोदी सरकार का 'मास्टरस्ट्रोक' माना जा रहा है। लेकिन बीजेपी के इस मास्टरस्ट्रोक वाले ऐलान की एक असलियत और भी है।

बीजेपी की रणनीति का अहम हिस्सा!

वैसे तो गुवाहटी और कोलकाता के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाने का ऐलान बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है, क्योंकि दोनों राज्य पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण हैं। बीजेपी पिछले 10 सालों से असम में सत्ता में है। पश्चिम बंगाल में पिछले एक दशक में यह लगभग न के बराबर मौजूदगी से सत्ता के लिए एक प्रमुख दावेदार बन गई है। वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की टॉप स्पीड 180 किमी/घंटा है।

क्यों खास है सरकार का ये ऐलान?

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की घोषणा से पूर्वोत्तर और पश्चिम बंगाल के बीच बेहतर रेल कनेक्टिविटी का वादा किया गया है। इससे दोनों क्षेत्रों के बीच आर्थिक और सामाजिक जुड़ाव को बढ़ावा मिलेगा। गुवाहाटी और कोलकाता पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर के दो सबसे महत्वपूर्ण शहर हैं। इन दोनों शहरों के बीच बड़ी संख्या में लोग नियमित रूप से यात्रा करते हैं।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन (सोर्स- सोशल मीडिया)

यह ट्रेन न सिर्फ यात्रा का समय कम करेगी, बल्कि आराम और सुरक्षा के मामले में भी एक नया स्टैंडर्ड तय करेगी। हालांकि, इसे एक राजनीतिक कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है। इस कदम से बीजेपी दोनों राज्यों में अपने वोटरों को यह संदेश देना चाहती है कि पूर्वी भारत, खासकर बंगाल और पूर्वोत्तर का विकास पार्टी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मोदी सरकार इस ट्रेन को विकास के प्रतीक के तौर पर पेश कर रही है।

बिहार के लिए किया था यही ऐलान

बिहार चुनाव से पहले अगस्त महीने में दिल्ली से पटना वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलानी की घोषणा की गई थी। तब ऐसा माना जा रहा था कि दिल्ली से पटना के बीच देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलेगी। बिहार चुनाव में NDA को इसका फायदा भी मिला। लेकिन अब पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन गुवाहाटी से कोलकाता के लिए चलाने का ऐलान किया गया है। हालांकि बिहार के सरकार अपने ऐलान से पीछे नहीं हटी है, लेकिन पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन के लिहाज से देखें तो यह धोखे के जैसा लग रहा है।

यह घोषणा मास्टरस्ट्रोक क्यों है?

अगर पार्टी इस वंदे भारत एक्सप्रेस का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर पाती है, तो वह पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की स्थिति में आ सकती है। राज्य में 294 विधानसभा सीटें हैं। 2021 के विधानसभा चुनावों में भाजपा गठबंधन को 77 सीटें और 38 प्रतिशत वोट मिले थे। दूसरी ओर, TMC गठबंधन ने 48 प्रतिशत वोट शेयर के साथ 216 सीटें जीतने में कामयाब रहा था।

असम के लिए यह ऐलान अहम

असम में बीजेपी 2021 में सत्ता में वापस आई। वहां, बीजेपी का मुख्य मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन से है। इस स्थिति में बीजेपी को इस चुनाव में मतदाताओं के सामने कुछ नए पैकेज पेश करने होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले 10 सालों से उठाए जा रहे मुद्दे अब उतने प्रभावी नहीं रहे हैं। बीजेपी ने राज्य में NRC और बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दे लगातार उठाए हैं। तीसरी बार उन्हीं मुद्दों के साथ जनता के बीच जाना एक चुनौती है।

कैसे बीजेपी को पहुंचेगा फायदा?

इस लिहाज से देखें तो नई ट्रेन के लॉन्च से मतदाताओं के बीच विकास पर चर्चा तेज़ होगी। इससे बीजेपी को फायदा होगा। यह सफलतापूर्वक यह संदेश दे सकती है कि केंद्र और राज्य दोनों स्तरों पर एक ही पार्टी के सत्ता में होने से विकास की गति तेज़ होती है। केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया है या उनकी आधारशिला रखी है। इस नई ट्रेन को इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।

बंगाल में मजबूत है 'दीदी' का दल

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की मुख्य प्रतिद्वंद्वी ममता बनर्जी की TMC है। पिछले चार लोकसभा और विधानसभा चुनावों को देखते हुए ऐसा लगता है कि बीजेपी एक निश्चित शिखर पर पहुंचने के बाद स्थिर हो गई है। राज्य में लगभग 38 प्रतिशत वोट बैंक के साथ उसकी मज़बूत उपस्थिति है। हालांकि, सीधे मुकाबले के कारण ममता बनर्जी की पार्टी को थोड़ा फायदा हुआ है, जिसके पास लगभग 48 प्रतिशत वोट बैंक है।

इसलिए पार्टी को नए मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए कुछ नए पैकेज पेश करने होंगे। इस संदर्भ में, बीजेपी इस नई ट्रेन के साथ राज्य में विकास पर चर्चा शुरू कर सकती है। अगर राज्य में विकास के मुद्दे चुनावी चर्चा का केंद्र बनते हैं, तो इसका सीधा फायदा बीजेपी को होगा, क्योंकि ममता बनर्जी की सरकार पिछले 15 सालों से सत्ता में है।

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