नूंह पहुंचा शहीद अग्निवीर समय सिंह का पार्थिव शरीर, फोटो- सोशल मीडिया 
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नूंह पहुंचा शहीद अग्निवीर समय सिंह का पार्थिव शरीर, अंतिम संस्कार में उमड़ पड़ा पूरा गांव

Karwa Chauth से एक दिन पहले नूंह जिले में गम और गर्व का माहौल छा गया। हर्षिल आर्मी कैंप के पास 5 अगस्त को बादल फटने से बाढ़ में लापता हुए अग्निवीर समय सिंह का पार्थिव शरीर करीब दो महीने बाद बरामद हुआ।

प्रतीक पाण्डेय

Agniveer Samay Singh Martyred: शनिवार को जब अग्निवीर समय सिंह का शव गांव पहुंचा तो हजारों लोग नम आंखों से अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई देने पहुंचे। राजकीय सम्मान के साथ उनका शहीद किरण शेखावत पार्क में अंतिम संस्कार किया गया।

अंतिम संस्कार में पूरे गांव में भावुक माहौल रहा। कांग्रेस विधायक आफताब अहमद, जिला प्रशासन के अधिकारी, सेना की 14 राइफल राज यूनिट, राजपूताना राइफल्स और एनएसजी कमांडो यूनिट के जवान शामिल हुए। गांव में “अमर रहे समय सिंह” के नारों से वातावरण गूंज उठा। हर आंख नम थी और दिलों में गर्व था कि गांव ने एक और सपूत देश के नाम कर दिया।

देश सेवा का जज्बा, पर किस्मत ने छीन लिया बेटा

समय सिंह अपने माता-पिता के इकलौते बेटे और दो बहनों के छोटे भाई थे। देश सेवा की भावना से प्रेरित होकर वे 30 अक्टूबर 2024 को अग्निवीर योजना के तहत सेना में भर्ती हुए थे। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद 5 जून 2025 को कुछ दिन के लिए घर आए और 20 जून को हर्षिल कैंप (उत्तरकाशी) में तैनात हुए। 5 अगस्त को कैंप के पास बादल फटने से आई बाढ़ में वे लापता हो गए थे। उनके पिता दलबीर सिंह, जो खुद सेना से रिटायर्ड हैं, ने बताया कि 4 अगस्त की शाम बेटे से आखिरी बात हुई थी। 7 अगस्त को सेना से लापता होने की सूचना आई, जिसने पूरे परिवार को तोड़ दिया।

अग्निवीर योजना पर सवाल

दलबीर सिंह ने भावुक होकर कहा, “मैंने बेटे को देश की सेवा के लिए भेजा था, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।” उन्होंने अग्निवीर योजना पर सवाल उठाते हुए कहा कि सिर्फ छह महीने की ट्रेनिंग के बाद जवानों को कठिन इलाकों में भेजना अनुचित है। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के बच्चे मजबूरी में इस योजना में जाते हैं, इसलिए सरकार को इसे खत्म कर देना चाहिए।

मुआवजे की मांग और गौरव की परंपरा

उजीना गांव के रिटायर्ड सैनिक करण सिंह ने बताया कि डीएनए जांच के बाद शव की पहचान की गई। उन्होंने शहीद परिवार के लिए मुआवजे में वृद्धि की मांग की। वहीं विधायक आफताब अहमद ने कहा कि “समय सिंह की शहादत मेवात की देशभक्ति की मिसाल है। उन्हें अधिकतम सम्मान और मुआवजा मिलना चाहिए।”

आपको बता दें कि कुर्थला गांव का इतिहास शौर्य और बलिदान से भरा है। 2015 में इसी गांव की लेफ्टिनेंट किरण शेखावत शहीद हुई थीं। अब अग्निवीर समय सिंह की शहादत ने इस परंपरा को और मजबूत कर दिया है।

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