मंडी में बादल फटने से बाढ़ जैसे हालात (Image- Screen Capture) 
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मंडी में बादल फटने से मची तबाही, 3 लोगों की मौत, VIDEO में देखें भयावह मंजर

Mandi Cloud Burst: मंडी जिले में भारी वर्षा और बादल फटने से तबाही हुई है जिसमें 3 लोगों की मौत हो गई। भूस्खलन से शहर की सड़कें बंद हो गई हैं खासकर जेल रोड में भारी नुकसान हुआ है।

अर्पित शुक्ला

Mandi Flood: हिमाचल प्रदेश के मंडी में एक बार फिर बाढ़ और बारिश ने तबाही मचाई है। मंगलवार सुबह एक बार फिर बादल फटने जैसी बारिश ने कहर बरपाया। लगातार बारिश की वजह से फ्लैश फ्लड की घटना में मंगलवार को 3 लोगों की मौत हो गई। सोमवार रात से हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में बारी बारिश हो रही है। मंडी में भी भारी बारिश की वजह से नदी-नाले उफान पर हैं। इसी बीच फ्लैश फ्लड की घटना हुई। फिलहाल जिला प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं। राहत और बचाव कार्य जारी है।

3 लोगों की मौत

बता दें कि मंडी के जेल रोड इलाके में अपनी गाड़ियों को निकालने के लिए कुछ लोग नाले के पास पहुंचे थे। इसी दौरान वे फ्लैश फ्लड की चपेट में आ गए। दो लोगों के शवों को निकाला जा चुका है, जबकि एक व्यक्ति का शव गाड़ियों के बीच फंसे होने की संभावना है।

सड़कों पर पानी और मलबा

तस्वीरों में नजर आया कि सड़कों पर पानी और मलबा दरिया की तरह बह रहा है। मंडी में मूसलधार बारिश के चलते कई हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात हैं। जेल रोड इलाके में पहाड़ों से पानी के साथ गाद और कीचड़ जैसा मलबा नीचे आया, जिसमें दर्जनों गाड़ियां क्षतिग्रस्त हो गईं।

बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

मूसलाधार बारिश सोमवार रात करीब 11 बजे शुरू हुई और सुबह 4 बजे तक तेज हो गई, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा। बताया जाता है कि सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक मंडी का जोनल अस्पताल है, जहां नाले ओवरफ्लो होने के कारण परिसर में पानी भर गया।

कई रास्ते बंद

फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के कारण जिले में कई रास्ते बंद हुए हैं। गंभीर हालातों के बाद कुछ क्षेत्रों में रहने वाले निवासियों के लिए भी खतरा बढ़ गया है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) और राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार, 28 जुलाई की शाम तक राज्यभर में 200 सड़कें अवरुद्ध रहीं।

1 महीने में 160 से अधिक लोगों की मौत

20 जून से 28 जुलाई तक हिमाचल प्रदेश में 160 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। 90 मौतें सीधे तौर पर भूस्खलन, फ्लैश फ्लड और बादल फटने जैसी घटनाओं के कारण हुईं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बाकी 74 मौतें इसी अवधि के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में हुईं।(एजेंसी इनपुट के साथ)

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