लाल बहादुर शास्त्री जयंती 2 अक्टूबर सोर्स-सोशल मिडिया
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Lal Bahadur Shastri: सरनेम नहीं, शिक्षा की उपाधि था शास्त्री! जानें देश के दूसरे PM के नाम की दिलचस्प कहानी

Lal Bahadur Shastri Jayanti 2 October: लाल बहादुर शास्त्री के नाम में 'शास्त्री' कोई जाति या उपनाम नहीं, बल्कि काशी विद्यापीठ से मिली शैक्षणिक उपाधि थी। शास्त्री जयंती पर जानें इसके पीछे का पूरा सच।

करुणा नंद शाहवाल

Lal Bahadur Shastri Surname History Shastri Title: भारतीय इतिहास में सादगी, ईमानदारी और अदम्य इच्छाशक्ति के प्रतीक रहे देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती हर साल 2 अक्टूबर को मनाई जाती है। 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में जन्मे लाल बहादुर शास्त्री के नाम से जुड़ा 'शास्त्री' शब्द वास्तव में उनका पारिवारिक उपनाम या सरनेम नहीं था। यह उनके द्वारा प्राप्त की गई एक उच्च शैक्षणिक उपाधि थी, जो आगे चलकर उनके व्यक्तित्व और सार्वजनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गई।

महज 16 वर्ष की आयु में महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के आह्वान पर उन्होंने अपनी स्कूली पढ़ाई छोड़ दी थी और स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े थे। बाद में, उन्होंने काशी विद्यापीठ (वर्तमान में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ) से दर्शन और मानविकी में अपनी पढ़ाई पूरी की। वर्ष 1925 में काशी विद्यापीठ द्वारा स्नातक की डिग्री के रूप में उन्हें 'शास्त्री' की उपाधि से सम्मानित किया गया, जिसके बाद लोग उन्हें सम्मानपूर्वक 'शास्त्री जी' कहकर पुकारने लगे।

मुगलसराय से शुरू हुई पढ़ाई

लाल बहादुर शास्त्री की शुरुआती शिक्षा मुगलसराय में हुई। इसके बाद उन्होंने वाराणसी जाकर हाई स्कूल की पढ़ाई की। इसी दौरान देश में आजादी की लड़ाई का माहौल था और किशोर लाल बहादुर का भी स्वतंत्रता आंदोलन की ओर रुझान बढ़ने लगा था।

जब महात्मा गांधी ने असहयोग आंदोलन के दौरान लोगों से आंदोलन से जुड़ने की अपील की, उस समय लाल बहादुर शास्त्री करीब 16 साल के थे। गांधीजी के आह्वान से प्रभावित होकर उन्होंने अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ दी और स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। हालांकि, बाद में उन्होंने दोबारा पढ़ाई शुरू की और अपनी शिक्षा पूरी की।

लाल बहादुर शास्त्री

काशी विद्यापीठ से हासिल की डिग्री

स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहने के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने वाराणसी स्थित काशी विद्यापीठ में शिक्षा हासिल की। आज इसे महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के नाम से जाना जाता है। उस

समय यह संस्थान ब्रिटिश शासन के खिलाफ राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने वाले प्रमुख केंद्रों में शामिल था। काशी विद्यापीठ में पढ़ाई के दौरान उन्हें राष्ट्रवादी विचारों और उस दौर के विद्वानों से सीखने का अवसर मिला। यहीं से उनके नाम के साथ जुड़ी ‘शास्त्री’ उपाधि की कहानी भी शुरू होती है।

1925 में मिली थी शास्त्री की उपाधि

काशी विद्यापीठ ने वर्ष 1925 में लाल बहादुर को ‘शास्त्री’ की उपाधि प्रदान की थी। यह विद्यापीठ की ओर से दी जाने वाली स्नातक स्तर की डिग्री थी। उन्होंने दर्शन और मानविकी के क्षेत्र में यह उपाधि हासिल की थी।

इसके बाद शास्त्री उनके नाम के साथ जुड़ गया और धीरे-धीरे यही उनकी सार्वजनिक पहचान बन गई। यानी ‘लाल बहादुर’ उनका मूल नाम था, जबकि ‘शास्त्री’ शिक्षा से मिली उपाधि।

लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थें

शास्त्री शब्द का क्या मतलब है?

बता दें कि भारतीय परंपरा में शास्त्री शब्द का उपयोग शास्त्रों का अध्ययन करने वाले विद्वानो के लिए किया जाता रहा है। लेकिन लाल बहादुर शास्त्री के नाम के संदर्भ में इसका संबंध सीधे काशी विद्यापीठ से मिली शैक्षणिक उपाधि से है।

यही वजह है कि उनके नाम में शास्त्री को समझने के लिए उनकी शिक्षा की कहानी को जानना जरूरी है। समय के साथ यह उपाधि उनके सार्वजनिक नाम का स्थायी हिस्सा बन गई।

पढ़ाई के साथ आजादी की लड़ाई में भी रहे सक्रिय

लाल बहादुर शास्त्री के जीवन में पढ़ाई और देश की आजादी की लड़ाई दोनों साथ-साथ चलती रहीं। कम उम्र में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल होने के लिए अपनी पढ़ाई छोड़ दी थी।

इसके बाद भी उन्होंने शिक्षा से नाता नहीं तोड़ा और बाद में काशी विद्यापीठ से अपनी पढ़ाई पूरी की। इतना ही नहीं स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

उनकी शिक्षा से मिलती है बड़ी सीख

लाल बहादुर शास्त्री की पढ़ाई की कहानी सिर्फ उनकी डिग्री तक सीमित नहीं है। इससे उनके जीवन का एक अहम पहलू सामने आता है। उन्होंने आंदोलन में शामिल होने के लिए पढ़ाई जरूर छोड़ी, लेकिन सीखने का सिलसिला जारी रखा।

बाद में काशी विद्यापीठ से मिली शास्त्री की उपाधि हमेशा के लिए उनके नाम से जुड़ गई। यही वजह है कि आगे चलकर देश उन्हें लाल बहादुर शास्त्री के नाम से जानने लगा।

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