संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू (फोटो- सोशल मीडिया)
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दिमागी नक्सल कौन? किरेन रिजिजू ने बताई इसकी परिभाषा, ये तीन इरादे रखने वालों पर निशाना

Dimagi Naxal Meaning: PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने माओवाद, अलगाववाद और देश को बांटने वाली सोच का समर्थन करने वालों का जिक्र किया।

अर्पित शुक्ला

Dimagi Naxals Kiren Rijiju Explains: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इस्तेमाल किए गए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बाद अब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है।

रिजिजू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष के नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री का इशारा उन लोगों की ओर था, जो माओवाद, अलगाववाद या देश को बांटने वाली गतिविधियों का समर्थन करते हैं।

रिजिजू ने बताई ‘दिमागी नक्सल’ की परिभाषा

किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि सरकार किन लोगों को ‘दिमागी नक्सल’ मानती है। उन्होंने तीन प्रमुख बिंदुओं का जिक्र किया।

  1. माओवाद का समर्थन करने वाले लोग- रिजिजू के मुताबिक, जो लोग माओवाद का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को स्वीकार नहीं करते, उन्हें इस श्रेणी में रखा जाता है।

  2. अलगाववादियों का समर्थन- उन्होंने कहा कि अलगाववादियों के साथ खड़े होने और अनुच्छेद 370 का समर्थन करने वाले लोगों को भी सरकार इसी नजरिए से देखती है।

  3. देश को बांटने की बात करने वाले- रिजिजू ने आरोप लगाया कि जो लोग भारत के पूर्वोत्तर को देश के बाकी हिस्से से अलग करने के लिए ‘चिकन नेक’ काटने जैसी बातें करते हैं, उन्हें भी सरकार ‘दिमागी नक्सल’ मानती है।

पीएम मोदी ने लाल किले से क्या कहा था?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में देशवासियों को ‘दिमागी नक्सल’ विचारधारा से सावधान रहने की अपील की थी।

पीएम मोदी ने कहा था कि भारत हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में आगे बढ़ा है, लेकिन उसके वैचारिक समर्थक हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने के मौके तलाशते रहते हैं। उन्होंने ऐसे तत्वों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करने की जरूरत पर जोर दिया।

विपक्ष ने सरकार पर बोला हमला

पीएम मोदी के बयान के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि पहले विपक्षी नेताओं को ‘अर्बन नक्सल’ कहा जाता था और अब ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने भी पीएम मोदी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी, जबकि तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सरकार पर सवाल उठाए।

क्या विपक्षी नेताओं को कहा गया ‘दिमागी नक्सल’?

रिजिजू की सफाई के मुताबिक, सरकार का दावा है कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द किसी खास विपक्षी नेता के लिए नहीं था, बल्कि उन लोगों के लिए इस्तेमाल किया गया जो माओवाद, अलगाववाद या हिंसा और अराजकता को बढ़ावा देने वाली विचारधारा का समर्थन करते हैं।

हालांकि, इस बयान को लेकर राजनीतिक विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच ‘दिमागी नक्सल’ शब्द को लेकर जुबानी जंग जारी है।

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