सबरीमाला व्रत को लेकर केरल में बवाल (कॉन्सेप्ट फोटो- सोशल मीडिया) 
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केरल में धर्म पर यूनिफॉर्म भारी? सबरीमाला व्रत के काले कपड़ों पर रोक! स्कूल के रूल पर राज्य में बवाल

Kerala News: केरल के त्रिशूर से एक बड़ा विवाद सामने आया है। यहां के एक नामी स्कूल ने तीसरी कक्षा के छात्र को महज इसलिए स्कूल में आने से रोक दिया, क्योंकि उसने काले कपड़े पहने हुए थे।

सौरभ शर्मा

Kerala School Sabarimala Vratham Controversy: केरल के त्रिशूर से एक बड़ा विवाद सामने आया है। यहां के एक नामी स्कूल ने तीसरी कक्षा के छात्र को महज इसलिए स्कूल में आने से रोक दिया, क्योंकि उसने काले कपड़े पहने हुए थे। यह बच्चा सबरीमाला तीर्थयात्रा के लिए 41 दिनों का 'व्रतम' (तपस्या) रख रहा था। स्कूल अपनी सख्त यूनिफॉर्म नीति पर अड़ गया, जिसके बाद यह धार्मिक आस्था और स्कूल अनुशासन का मामला बन गया। इस घटना के विरोध में कई दक्षिणपंथी संगठन भी उतर आए हैं।

यह पूरा मामला त्रिशूर के एक निजी स्कूल का है। स्कूल अधिकारियों का इस पर स्पष्ट कहना है कि वे एक बहुत सख्त यूनिफॉर्म नीति का पालन करते हैं। परिसर में केवल निर्धारित यूनिफॉर्म पहनने की ही अनुमति है। स्कूल का दावा है कि इस नियम के बारे में दाखिले के समय ही अभिभावकों को स्पष्ट रूप से बता दिया जाता है। स्कूल के मुताबिक, यह घटना 3 नवंबर को हुई थी। इस विवाद के बाद से बच्चे ने स्कूल आना ही बंद कर दिया है।

यूनिफॉर्म की जिद या आस्था पर चोट?

स्कूल प्रबंधन ने साफ किया है कि बच्चे के माता-पिता को नीति के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था और उन्हें नियमों का पालन करना चाहिए। लेकिन छात्र के परिवार और धार्मिक अनुष्ठान से जुड़े लोगों के लिए यह आस्था का सवाल बन गया है। उनका मानना है कि धार्मिक परंपराओं के लिए थोड़ी छूट दी जानी चाहिए थी। स्कूल के इस रुख के बाद, कई दक्षिणपंथी समूहों ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताना शुरू कर दिया है। उन्होंने स्कूल के फैसले को हिंदू परंपराओं के प्रति असंवेदनशील बताया है, जिससे यह विवाद और गहरा गया है।

क्यों खास है यह 41 दिन का व्रतम?

सबरीमाला तीर्थयात्रा में इस 'व्रतम' का विशेष महत्व है। यह 41 दिनों की एक कठिन तपस्या अवधि होती है, जो आमतौर पर मलयालम महीने 'वृश्चिकम' (नवंबर के आसपास) में शुरू होती है। यह सबरीमाला मंदिर में 'मंडला पूजा' (दिसंबर में) के दिन तक जारी रहती है। इस 'व्रतम' को एक प्रारंभिक अनुशासन के रूप में देखा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य भक्तों को व्यक्तिगत नियंत्रण विकसित करने, भौतिक जीवन से अलगाव या वैराग्य पैदा करने और अपनी तीर्थयात्रा पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करने में मदद करना है। इस दौरान भक्त सादे और आमतौर पर काले या गहरे रंग के कपड़े ही पहनते हैं।

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