ज्योतिरादित्य सिंधिया 
देश

अगर राजनीति में नहीं तो... कहां होते सिंधिया, नवभारत कॉन्क्लेव में खुद बताया, इस शख्स ने किया प्रभावित

Viksit Bharat Leadership Conclave 2026: विकसित भारत कॉन्क्लेव में सिंधिया ने निजी जीवन, राजनीति और पिता की सीखों पर बात की और बताया कि 2047 का भारत उनके लिए आर्थिक नहीं, बल्कि समग्र विकास का संकल्प।

अक्षय साहू

Jyotiraditya Scindia Navbharat Conclave 2026: नवभारत द्वारा आयोजित 'विकसित भारत लीडरशिप कॉन्क्लेव 2026' में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने निजी जीवन, राजनीति और जनसेवा से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने कहा कि उनके लिए राजनीति कभी अंतिम लक्ष्य नहीं रही, बल्कि लोगों की सेवा करने का एक माध्यम है। उन्होंने अपने पिता से मिली सीख का उल्लेख करते हुए कहा कि जीवन में हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलना चाहिए और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास करना चाहिए। सत्र में जब उनसे पूछा गया कि यदि जीवन में एक बदलाव करने का अवसर मिले तो वह क्या करना चाहेंगे, इस पर सिंधिया ने कहा कि वह अपने परिवार के लिए थोड़ा अधिक समय निकालना चाहेंगे। उन्होंने स्वीकार किया कि सार्वजनिक जीवन की व्यस्तताओं के कारण परिवार को पर्याप्त समय देना हमेशा आसान नहीं होता।

पिता और दादी से मिली जीवन की सीख

जब उनसे पूछा गया कि उनके जीवन पर सबसे अधिक किसका प्रभाव रहा, तो उन्होंने अपने पिता और दादी (आजी अम्मा) का नाम लिया। सिंधिया ने कहा कि दोनों ने उन्हें ईमानदारी, सादगी और जनसेवा के संस्कार दिए। उन्होंने बताया कि उनके पिता हमेशा सच्चाई के मार्ग पर चलने और लोगों की सेवा को जीवन का उद्देश्य बनाने की प्रेरणा देते थे।

नवभारत के एडिचर इन चीफ निमिष माहेश्वरी और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया

सिंधिया ने सवाल-जवाब के दौरान कहा कि उन्हें क्रिकेट की तुलना में किताबें अधिक पसंद हैं। वहीं संसद और जनसभा में से उन्होंने जनसभा को प्राथमिकता दी। सोशल मीडिया और जमीनी राजनीति में से उन्होंने जमीनी जनसेवा को अधिक महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका विश्वास लोगों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने में है।

राजनीति केवल सेवा का माध्यम

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि उनके परिवार की विचारधारा हमेशा जनसेवा पर आधारित रही है। उन्होंने कहा, "मेरे पिताजी हमेशा कहते थे कि हमारा लक्ष्य जनसेवा होना चाहिए, राजनीति केवल उस लक्ष्य तक पहुंचने का माध्यम है।" उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने कार्यों से किसी एक इंसान का जीवन भी बेहतर बना सके, तो वही उसके जीवन की सबसे बड़ी सफलता है। अपने संबोधन में सिंधिया ने आध्यात्मिक दृष्टिकोण भी साझा किया। उन्होंने कहा कि जीवन के अंत में यह मायने नहीं रखता कि कोई कितनी बार सांसद या मंत्री बना या उसके पास कितनी संपत्ति थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि व्यक्ति एक अच्छा इंसान बना या नहीं। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन का उद्देश्य ईमानदारी और सेवा को बनाना चाहिए।

2047 के भारत को लेकर जताई उम्मीद

जब उनसे पूछा गया कि साल 2047 में आज के दौर को किस रूप में याद किया जाएगा, तो सिंधिया ने कहा कि वह चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ियां इस समय को भारत में परिवर्तन और क्रांति के दौर के रूप में याद करेंगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के समग्र विकास और नागरिकों के बेहतर भविष्य का संकल्प है।

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