Justice KM Joseph On Census Based Delimitation: जनसंख्या आधारित परिसीमन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस केएम जोसेफ ने दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को गंभीर बताते हुए महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। केरल हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि यदि नई जनगणना के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्निर्धारण होता है, तो दक्षिणी राज्यों के नागरिकों के वोट का मूल्य कम हो सकता है और संसद में उनकी प्रभावी भागीदारी प्रभावित होगी।
अपनी दलील को मजबूत करने के लिए उन्होंने अमेरिकी संविधान और वहां की सीनेट व्यवस्था का उदाहरण दिया, जहां सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिलता है। जस्टिस जोसेफ ने कहा कि लोकतंत्र में ‘शासितों की सहमति’ का सिद्धांत बेहद महत्वपूर्ण है और परिसीमन के मुद्दे पर सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए संतुलित समाधान निकाला जाना चाहिए।
जस्टिस के.एम. जोसेफ ने अमेरिका के संवैधानिक अनुभवों का हवाला देते हुए कहा कि भारत की जनप्रतिनिधित्व व्यवस्था मूल रूप से जनसंख्या पर आधारित है।
वर्तमान में राज्यों के प्रतिनिधित्व का आधार 1971 की जनगणना है, लेकिन नई जनगणना के बाद प्रस्तावित परिसीमन को लेकर दक्षिण भारतीय राज्यों में असंतुलन की आशंका बढ़ गई है।
जस्टिस जोसेफ का कहना है कि यदि परिसीमन के बाद दक्षिणी राज्यों के वोट का महत्व घटता है, तो संसद में उनकी आवाज भी कमजोर हो जाएगी। उन्होंने कहा, “यदि हमारे वोट का महत्व कम हो जाता है, तो संसद की कार्यवाही भी हमारे लिए उतनी प्रभावी नहीं रह जाएगी।
इसलिए यह जरूरी है कि इस मुद्दे का ऐसा समाधान निकाला जाए, जिस पर सभी पक्ष सहमत हो सकें।” उन्होंने जोर देकर कहा कि परिसीमन केवल सीटों का पुनर्वितरण नहीं, बल्कि संघीय संतुलन और सभी राज्यों के समान प्रतिनिधित्व का भी सवाल है।
परिसीमन पर अपनी दलील रखते हुए जस्टिस के.एम. जोसेफ ने अमेरिका की सीनेट का उदाहरण दिया। अमेरिका में 50 राज्य हैं और हर राज्य को, उसकी आबादी चाहे जितनी भी हो,
सीनेट में दो-दो सीटें मिलती हैं। यानी वहां राज्यों का प्रतिनिधित्व जनसंख्या के बजाय समानता के सिद्धांत पर आधारित है।
दक्षिण भारत में खासकर तमिलनाडु में परिसीमन का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में है। सत्तारूढ़ टीवीके, विपक्षी डीएमके और एआईएडीएमके, तीनों दलों का रुख लगभग एक जैसा है।
उनका कहना है कि परिसीमन के बाद भी लोकसभा की कुल 543 सीटें बरकरार रहनी चाहिए और तमिलनाडु की मौजूदा 39 सीटों में कोई कटौती नहीं होनी चाहिए।
परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विशेष सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लोकसभा सीटों में कम से कम 50% बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था।
हालांकि, यह संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और मतदान में पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण पारित नहीं हो पाया।
20 अगस्त को हुई सदर्न जोनल काउंसिल की बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने केंद्र के सामने राज्य का पक्ष रखा। उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मांग की कि यदि नया परिसीमन लागू होता है,
तो जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले दक्षिणी राज्यों की लोकसभा सीटों में किसी भी तरह की कटौती नहीं होनी चाहिए। विजय का कहना था कि प्रतिनिधित्व में संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्र को इस संबंध में स्पष्ट गारंटी देनी चाहिए, ताकि दक्षिणी राज्यों की राजनीतिक हिस्सेदारी प्रभावित न हो।