कोलकाता ट्रेनी डॉक्टर हत्या मामला (सोर्स:-सोशल मीडिया) 
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कोलकाता कांड के बाद नींद से जागे जेपी नड्डा, डॉक्टर्स की सुरक्षा के लिए राज्यों को दी सलाह

कोलकाता में ट्रेनी डॉक्टर के साथ हुए कांड को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नींद खुलती हुई नजर आ रही है, जहां स्वास्थय मंत्रालय ने राज्यों को डॉक्टर्स और अस्पतालों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की सलाह दी है।

शुभम पाठक

नई दिल्ली: कोलकाता में आरजी कर कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर की हत्या मामवे में अब एक रौद्र रूप ले लिया है। दरिंदगी के बाद ट्रेनी डॉक्टर की हत्या मामले ने बंगाल सरकार तक को सवालों के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है। इस हादसे के बाद डॉक्टर अपनी सुरक्षा और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे है और इतने दिनों के संघर्ष और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद0 बाद आखिरकार इस मामले में अब जाकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की नींद खुलती हुई दिखाई दे रही है।

डॉक्टर हत्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक फरमान जारी किया है जिसमें सभी राज्यों को अपने राज्य के अस्पताल और चिकित्सकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने की सलाह दी है।

याद दिला दें कि रेजिडेंट डॉक्टरों ने कार्यस्थलों पर स्वास्थ्य पेशेवरों की सुरक्षा और उनके सहयोगियों के लिए न्याय के लिए एक केंद्रीय कानून की मांग करते हुए पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने लिखा पत्र

प्राप्त जानकारी के अनुसार, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने 23 अगस्त को डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को पत्र लिखकर कुछ चिजों पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रीत करने की सलाह दी है। जिसमें कोलकाता की घटना के बाद चिकित्सा संस्थानों में हुई हिंसा और विरोध प्रदर्शन के मुद्दे की ओर आकर्षित किया। जिसमें उन्होंने कहा कि घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 20 और 22 अगस्त को आदेश पारित किए।

अपूर्व चंद्रा ने दी जानकारी

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लिखे पत्र में केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने कहा कि शीर्ष अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि राज्य सरकारें दो सप्ताह की अवधि के भीतर स्थिति की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सुधारात्मक और उचित कार्रवाई करेंगी। इस संबंध में निम्नलिखित कुछ तात्कालिक उपाय हैं जिन पर स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा बढ़ाने और उनके लिए सुरक्षित कार्य वातावरण प्रदान करने के लिए विचार किया जा सकता है।

इसके साथ ही स्वास्थ्य सचिव अपूर्व चंद्रा ने लिखे गए पत्र में अस्पताल सुरक्षा समिति और हिंसा रोकथाम समिति के गठन का आह्वान किया गया है, जिसमें वरिष्ठ डॉक्टर और प्रशासनिक अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे, ताकि उचित सुरक्षा उपायों की रणनीति बनाई जा सके और उन्हें लागू किया जा सके।

जानिए सुप्रीम कोर्ट का आदेश

इसके साथ ही अगर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की बात करें तो 22 अगस्त को जारी अपने आदेश में कोर्ट ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों के साथ मिलकर काम करने को कहा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह पहल यह सुनिश्चित करेगी कि एनटीएफ की रिपोर्ट आने तक राज्य सरकारें/केंद्र शासित प्रदेश कुछ बुनियादी न्यूनतम आवश्यकताओं को लागू करें, ताकि कार्यस्थल पर डॉक्टरों की सुरक्षा को लेकर उनकी चिंताओं का समाधान किया जा सके।

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