JNU में चारों सीटों पर लेफ्ट का कब्जा (फोटो- सोशल मीडिया) 
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JNU में 'लाल' लहर का धमाल! चारों सीटों पर लेफ्ट ने किया कब्जा; ABVP खाली हाथ

JNU छात्रसंघ चुनाव, जिसे देश में वैचारिक संघर्ष का प्रतीक माना जाता रहा है, देर रात उसके फाइनल नतीजे आ गए हैं। गुरुवार देर शाम तक चली वोटों की गिनती के बाद कैंपस एक बार फिर से लाल विचारधार से रंग गया।

सौरभ शर्मा

JNU Election Final Result 2025: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) छात्रसंघ चुनाव, जिसे देश में वैचारिक संघर्ष का प्रतीक माना जाता रहा है, आज उसके फाइनल नतीजे आ गए हैं। गुरुवार देर शाम तक चली वोटों की गिनती के बाद कैंपस एक बार फिर से पूरा 'लाल' हो गया है। इस बार मुख्य मुकाबला लेफ्ट यूनिटी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के बीच था। मंगलवार को वोटिंग के बाद से ही सबकी निगाहें नतीजों पर टिकी थीं, शुरू से ही बढ़त के साथ और आखिर में लेफ्ट ने बाजी मार ली है।

इस बार के चुनाव में ABVP को बड़ा झटका लगा है। पिछले साल एक सीट हासिल करने वाली ABVP इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई और चारों केंद्रीय पैनल सीटों पर चुनाव हार गई है। वहीं, कांग्रेस समर्थित छात्र संगठन NSUI का प्रदर्शन भी बेहद निराशाजनक रहा और वह किसी भी सीट पर मुख्य मुकाबले में नजर नहीं आई। जेएनयू में चुनाव EVM से नहीं, बल्कि बैलेट पेपर से होते हैं, इसीलिए वोटों की गिनती में इतना समय लगा।

अदिति बनीं अध्यक्ष, गोपिका को उपाध्यक्ष पद

लेफ्ट यूनिटी ने केंद्रीय पैनल की सभी चार सीटों पर जीत हासिल की है। अध्यक्ष पद पर अदिति मिश्रा ने 1937 वोट हासिल कर जीत अपने नाम की। उनके करीबी प्रतिद्वंद्वी विकास पटेल को 1488 वोट मिले। वहीं, उपाध्यक्ष पद पर कीझाकूट गोपिका बाबू ने 3101 वोटों के साथ शानदार जीत दर्ज की, जबकि दूसरे नंबर पर रहीं तान्या कुमारी को 1787 वोट मिले।

सुनील और दानिश ने भी लहराया परचम

महासचिव पद पर भी लेफ्ट के सुनील यादव ने 2005 वोट पाकर जीत हासिल की। यह मुकाबला काफी करीबी रहा, जिसमें राजेश्वर कांत दुबे को 1901 वोट मिले। संयुक्त सचिव के पद पर दानिश 2083 वोट पाकर विजयी हुए, उन्होंने 1797 वोट पाने वाले अनुज को हराया। रुझानों में दिन भर उतार-चढ़ाव देखने को मिला, लेकिन अंतिम परिणामों में लेफ्ट यूनिटी ने क्लीन स्वीप करते हुए चारों पदों पर अपना कब्जा बरकरार रखा।

इस बार के चुनाव में कांटे की टक्कर ने जेएनयू की छात्र राजनीति को एक बार फिर देश की सबसे चर्चित छात्र राजनीति बना दिया। एक तरफ लेफ्ट यूनिटी ‘समावेशी, सुलभ और लोकतांत्रिक जेएनयू’ को बचाने के एजेंडे पर लड़ी, वहीं एबीवीपी ‘प्रदर्शन और राष्ट्रवाद’ के मुद्दे पर छात्रों को साधने का प्रयास किया गया।

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