एबीवीपी (सोर्स- आएएनएस) 
देश

महिला विरोधी राजनीति और वामपंथियों के पाखंड के खिलाफ ABVP का हल्लाबोल, इंडी गठबंधन का फूंका पुतला

Protest In JNU: महिला आरक्षण विधेयक के मार्ग में रोड़ा अटकाने और महिलाओं के प्रति संकीर्ण मानसिकता रखने के विरोध में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने जेएनयू में विपक्ष का पुतला दहन किया।

अमन मौर्या

ABVP Protest In JNU: अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय इकाई ने रविवार को जेएनयू परिसर के साबरमती ढाबा पर वामपंथी दलों और महिला विरोधी इंडी गठबंधन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। महिला आरक्षण विधेयक के मार्ग में रोड़ा अटकाने और महिलाओं के प्रति संकीर्ण मानसिकता रखने के विरोध में विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विपक्ष का पुतला दहन किया।

इस दौरान छात्रों ने वामपंथी संगठनों और कांग्रेस की 'महिला विरोधी' राजनीति के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके पाखंड को उजागर किया। कांग्रेस, वामपंथी दलों और उनके छात्र संगठनों का दशकों पुराना इतिहास महिलाओं के अधिकारों को कुचलने और उनके नाम पर केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने का रहा है। इन दलों ने हमेशा प्रगतिशील होने का ढोंग रचा, लेकिन जब भी महिलाओं को वास्तविक शक्ति देने या उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करने का अवसर आया तो इन समूहों ने अपनी पितृसत्तात्मक और रूढ़िवादी सोच के कारण उसे बाधित किया।

नहीं चलेगी दोहरी राजनीति

विरोध कर रहे छात्रों ने यह संदेश दिया कि इंडी गठबंधन की यह दोहरी राजनीति अब और नहीं चलेगी। वामपंथी विचारधारा वाले संगठन जेएनयू परिसर के भीतर भी महिलाओं के मुद्दों का उपयोग केवल शैक्षणिक अशांति फैलाने के लिए करते हैं, जबकि उनके स्वयं के सांगठनिक ढांचे में महिलाओं की आवाज को दबा दिया जाता है। यह स्पष्ट देखा गया है कि महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले पदों पर आज भी केवल पुरुषों का वर्चस्व बना हुआ है। अभाविप ने इस बात पर जोर दिया कि इंडी गठबंधन में शामिल दल महिलाओं को केवल एक 'वोट बैंक' की तरह इस्तेमाल करते आए हैं और उनकी नीतियों में व्याप्त यह विरोधाभास अब पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।

महिलाओं को मुख्यधारा से रोका

एबीवीपी के जेएनयू अध्यक्ष मयंक पांचाल ने कहा कि वामपंथी दलों और कांग्रेस ने वर्षों से महिलाओं के अधिकारों के विमर्श को बंधक बनाकर रखा है । इंडी गठबंधन की यह सोची-समझी साजिश थी कि महिलाओं को कभी भी मुख्यधारा की राजनीति और शक्ति के केंद्रों तक न पहुंचने दिया जाए। इन दलों की 'महिला विरोधी' सोच के कारण ही महिला आरक्षण जैसे ऐतिहासिक सुधारों में देरी हुई, जिसे महिला शक्ति ने सड़क पर उतरकर पूरी तरह नकार दिया है।

विपक्ष ने फैलाया भ्रम

एबीवीपी जेएनयू मंत्री प्रवीण कुमार पीयूष ने कहा कि साबरमती ढाबा पर हुआ यह प्रदर्शन इंडी गठबंधन और वामपंथी दलों के असली चेहरे को उजागर करने के लिए था। ये दल महिला सशक्तिकरण के नाम पर केवल झूठ और भ्रम फैलाते रहे हैं, जबकि वास्तविकता में इनका तंत्र महिलाओं की प्रगति को रोकने का काम करता है। जेएनयू इस महिला विरोधी सिंडिकेट को कभी स्वीकार नहीं करेगा और महिलाओं की गरिमा व उनके वास्तविक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगा।

एजेंसी इनपुट के साथ...

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