जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा (सोर्स-सोशल मीडिया) 
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6 साल बाद राष्ट्रपति शासन से मुक्त हुआ जम्मू-कश्मीर, बुधवार को होगा नई सरकार का शपथ ग्रहण!

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब सरकार गठन की तैयारियां चल रही हैं। इसके साथ ही घाटी में छह साल से लगा राष्ट्रपति शासन अब हट गया है। जिसके बाद यहां सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन ने जीत हासिल की है।

अभिषेक सिंह

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद अब सरकार गठन की तैयारियां चल रही हैं। इसके साथ ही घाटी में छह साल से लगा राष्ट्रपति शासन अब हट गया है। जिसके बाद यहां सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया है। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस गठबंधन ने जीत हासिल की है। उसने 49 सीटों पर जीत हासिल की है जबकि भाजपा को 29 सीटें मिली हैं।

जम्मू-कश्मीर में आखिरी बार विधानसभा चुनाव साल 2014 में हुए थे। चुनाव के बाद भाजपा और पीडीपी ने गठबंधन कर सरकार बनाई थी। लेकिन 2018 में भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद सरकार गिर गई और महबूबा मुफ्ती ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से ही जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ था, जो अब हट गया है।

चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी नेशनल कॉन्फ्रेंस को निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन मिलने लगा है। अब जम्मू के छंब विधानसभा से चुनाव जीतने वाले निर्दलीय नेता सतीश शर्मा नेशनल कॉन्फ्रेंस में शामिल हो गए हैं। रविवार को डोडा में एक रैली को संबोधित करते हुए आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार बनाने में एनसी को पूरा समर्थन देगी।

कब लगा था राष्ट्रपति शासन?

जम्मू-कश्मीर में 21 नवंबर 2018 को बीजेपी के समर्थन वापस लेने के बाद राज्य की महबूबा मुफ्ती सरकार गिर गई थी। जिसके बाद राज्य संविधान की धारा 92 के अनुसार जम्मू-कश्मीर में 6 माह के लिए राज्यपाल शासन लगाया गया था। राज्यपाल शासन की अवधि खत्म होने के बाद यहां केन्द्र सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगा दिया था, जिसे आज यानी रविवार 13 अक्टूबर को हटा लिया गया है।

राष्ट्रपति शासन हटना जरूरी क्यों?

राष्ट्रपति शासन के तहत विधानसभा के कामकाज से जुड़े जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के कई प्रावधानों को निलंबित कर दिया गया था। नई सरकार के कार्यभार संभालने से पहले इन प्रावधानों को बहाल करना पड़ा। क्योंकि निर्वाचित सरकार को शपथ लेने देने के लिए राष्ट्रपति शासन की घोषणा को रद्द करना जरूरी है।

राष्ट्रपति शासन हटाने के आदेश के बाद केंद्र शासित प्रदेश में सरकार गठन का रास्ता साफ हो गया है। आपको बता दें कि हाल ही में 90 सदस्यीय विधानसभा में विधानसभा चुनाव हुए थे। इस चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बहुमत हासिल किया है। नेशनल कॉन्फ्रेंस ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ा था। उमर अब्दुल्ला ने उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया था।

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