केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (फोटो- सोशल मीडिया) 
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ईरान-इजराइल तनाव से भारत की ईंधन आपूर्ति पर कोई असर नहीं, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिलाया भरोसा

मध्य पूर्व में ईरान-इस्राइल तनाव के बीच केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत की ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है और जनता को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

सौरभ शर्मा

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी ईरान-इजराइल तनाव के चलते वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर आशंकाएं बढ़ रही हैं। लेकिन भारत के केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने रविवार को साफ किया कि भारत की ईंधन आपूर्ति पूरी तरह सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि भारत ने वर्षों से तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाकर ऐसा मजबूत नेटवर्क बनाया है, जिससे आपूर्ति पर किसी बाहरी तनाव का असर नहीं पड़ेगा।

पुरी ने जनता से अपील की कि अफवाहों पर ध्यान न दें और ईंधन की कीमतों या उपलब्धता को लेकर घबराएं नहीं। उन्होंने कहा कि भारत की तेल विपणन कंपनियों (OMCs) के पास कई सप्ताह का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वैकल्पिक मार्गों से आपूर्ति लगातार जारी रहेगी।

होर्मुज जलडमरूमध्य के असर से भारत लगभग मुक्त

केंद्रीय मंत्री ने एक्स पोस्ट के जरिए कहा कि “हम मध्य पूर्व की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। पहले की तुलना में अब हमारी ईंधन आपूर्ति का बड़ा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भर नहीं है।” होर्मुज एक प्रमुख समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का 30% कच्चा तेल गुजरता है।

पुरी ने यह भी जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने तेल खरीद के लिए कई देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। इस रणनीति का उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में तेल संकट को टालना है। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है।

ईरान की संसद ने किया प्रस्ताव पारित, IEA ने जताई चिंता

ईरान की संसद ने हाल ही में होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का प्रस्ताव पारित किया है। इस पर अंतिम निर्णय ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल लेगी। यदि यह रास्ता बंद होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने भी चेताया है कि जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की रुकावट तेल की कीमतों में भारी उछाल ला सकती है। भारत जैसी ऊर्जा आयातक अर्थव्यवस्था के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन भारत की पूर्व तैयारी से स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है।

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