Highlights:
भारत ने पाकिस्तान से अपने अवैध कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को खाली करने की मांग की।
रघु पुरी ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा बताया।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान में अल्पसंख्यक हिंदुओं के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया गया।
India At United Nations: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए करने का आरोप लगाया है। भारत ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न और अटूट हिस्सा है और पाकिस्तान को अपने अवैध कब्जे वाले सभी इलाकों को खाली करना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। भारतीय प्रतिनिधि रघु पुरी ने कहा कि पाकिस्तान को अपने नागरिकों की भलाई और वहां रहने वाले अल्पसंख्यक हिंदुओं के अधिकारों पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा, भारत ने धार्मिक स्वतंत्रता और जलवायु परिवर्तन से जुड़े मुद्दों पर भी अपना पक्ष रखा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर चर्चा के दौरान भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघु पुरी ने पाकिस्तान के रुख पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बार-बार इस मंच का इस्तेमाल भारत के खिलाफ प्रचार करने के लिए करता है।
पुरी ने जम्मू-कश्मीर को भारत का अभिन्न और अटूट हिस्सा बताते हुए पाकिस्तान से अपने अवैध कब्जे वाले सभी क्षेत्रों को खाली करने की मांग की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रतिनिधियों को अपनी सेना के निर्देशों पर चलने के बजाय अपने देश के लोगों की भलाई पर ध्यान देना चाहिए।
भारत ने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले व्यवहार की आलोचना भी की। पुरी ने कहा कि अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करना संबंधित देश की जिम्मेदारी है। उन्होंने पाकिस्तान से अपने यहां रहने वाले हिंदुओं समेत कमजोर समुदायों की सुरक्षा और उनके अधिकारों पर ध्यान देने को कहा।
भारत ने अपनी विविध सांस्कृतिक विरासत और संवैधानिक व्यवस्था का उल्लेख करते हुए बताया कि देश में धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संवैधानिक प्रावधान मौजूद हैं। पुरी ने यह भी कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों ने भारत के राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और वे सरकार के शीर्ष पदों तथा प्रमुख संस्थानों में भी अपनी भूमिका निभाते हैं।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने धर्म या विश्वास की स्वतंत्रता पर विशेष प्रतिवेदक के साथ चर्चा में भारत का पक्ष रखा। उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान धार्मिक भेदभाव से संबंधित रिपोर्ट के दृष्टिकोण पर सवाल उठाए। साथ ही आतंकवादियों के अंतिम संस्कार के अधिकारों की वकालत से जुड़े मुद्दे पर भी आपत्ति जताई।
संयुक्त राष्ट्र महासभा की तीसरी समिति में भारत ने जलवायु परिवर्तन से निपटने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। इस विषय पर उप सचिव बरखा ताम्रकार ने न्यायाधीशों और वकीलों की स्वतंत्रता से जुड़े विशेष प्रतिवेदक की रिपोर्ट पर भारत का पक्ष रखा। रिपोर्ट में जलवायु संकट से निपटने में न्याय व्यवस्था की भूमिका पर चर्चा की गई थी।
ताम्रकार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन विकास, आजीविका और मानवाधिकारों को प्रभावित करने वाली गंभीर वैश्विक चुनौती है। भारत का दृष्टिकोण समानता, जलवायु न्याय और सतत विकास पर आधारित है। उन्होंने साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों और संबंधित क्षमताओं (CBDR-RC) के सिद्धांत का भी उल्लेख किया।
भारत ने पर्यावरण संरक्षण के लिए संविधान, संबंधित कानूनों, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) और स्वतंत्र न्यायपालिका की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जीवन और समानता के मौलिक अधिकारों को जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों के संदर्भ में दिए गए महत्व का जिक्र किया।
इस तरह संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों, अल्पसंख्यकों के अधिकारों, धार्मिक स्वतंत्रता और जलवायु न्याय जैसे मुद्दों पर अपना पक्ष रखा।