

संयुक्त राष्ट्र का नाम 1942 में पहली बार आधिकारिक घोषणा में इस्तेमाल हुआ
सैन फ्रांसिस्को सम्मेलन में 50 देशों ने UN चार्टर तैयार किया था
सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों के पास वीटो का अधिकार है
United Nations Day: दुनिया में जब भी युद्ध, शांति या अंतरराष्ट्रीय विवादों की बात होती है, तो संयुक्त राष्ट्र यानी यूनाइटेड नेशंस का नाम जरूर सामने आता है। दुनिया के करीब-करीब हर देश से जुड़े इस संगठन का मकसद अंतरराष्ट्रीय शांति बनाए रखना, देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और मानवीय संकटों से निपटना है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि संयुक्त राष्ट्र का नाम इसकी आधिकारिक स्थापना से करीब तीन साल पहले ही इस्तेमाल किया जा चुका था।
इस संगठन को नोबेल शांति पुरस्कार भी मिल चुका है। संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी ऐसी ही कई दिलचस्प बातें हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। आइए जानते हैं UN से जुड़े 10 ऐसे रोचक तथ्य, जो आपको इस वैश्विक संगठन के इतिहास और कामकाज को समझने में मदद करेंगे।
संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक स्थापना 24 अक्टूबर 1945 को हुई थी, लेकिन इसका नाम इससे करीब तीन साल पहले ही इस्तेमाल किया जा चुका था। 1 जनवरी 1942 को अमेरिकी राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट की पहल पर 26 देशों ने संयुक्त राष्ट्र घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे। इन देशों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान धुरी राष्ट्रों के खिलाफ मिलकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया था। इसी घोषणा में पहली बार United Nations नाम का इस्तेमाल किया गया। बाद में यही नाम दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगठनों में से एक की पहचान बना।
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना के लिए 1945 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में एक ऐतिहासिक सम्मेलन आयोजित किया गया था। इसमें 50 देशों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और संगठन के चार्टर को तैयार किया। 26 जून 1945 को इन देशों ने चार्टर पर हस्ताक्षर किए। बाद में पोलैंड ने भी इस पर हस्ताक्षर किए और उसे संस्थापक सदस्यों में शामिल किया गया। इस तरह संयुक्त राष्ट्र के शुरुआती सदस्य देशों की संख्या 51 हो गई। आज इस संगठन में कुल 193 सदस्य देश हैं।
संयुक्त राष्ट्र के झंडे को पहली नजर में देखकर शायद आप उसके प्रतीकों के पीछे छिपे संदेश पर ध्यान न दें। इसके प्रतीक में दुनिया का नक्शा जैतून की शाखाओं से घिरा हुआ है। जैतून की शाखाएं शांति का प्रतीक हैं, जबकि नीला रंग संगठन की पहचान का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य दुनिया को शांति, सहयोग और एकजुटता का संदेश देना है। संयुक्त राष्ट्र के इस झंडे को 20 अक्टूबर 1947 को आधिकारिक मंजूरी मिली थी।
संयुक्त राष्ट्र के शांति सैनिकों को आमतौर पर ब्लू हेलमेट के नाम से पहचाना जाता है। ये सैनिक और पुलिसकर्मी अलग अलग सदस्य देशों से आते हैं और संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में हिस्सा लेते हैं। इनका काम संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में शांति बनाए रखने, नागरिकों की सुरक्षा में मदद करने और शांति समझौतों को लागू कराने में सहयोग देना हो सकता है। संयुक्त राष्ट्र का पहला शांति अभियान 1948 में मध्य पूर्व में शुरू हुआ था। हालांकि शांति सैनिकों की शक्तियां और जिम्मेदारियां हर अभियान के जनादेश के अनुसार अलग अलग होती हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस पांच स्थायी सदस्य हैं। इन देशों को वीटो का अधिकार प्राप्त है। इसका मतलब है कि सुरक्षा परिषद के किसी महत्वपूर्ण गैर प्रक्रियात्मक प्रस्ताव को इन पांच देशों में से किसी एक का नकारात्मक वोट रोक सकता है। यह व्यवस्था दूसरे विश्व युद्ध के बाद की वैश्विक शक्ति संरचना को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। हालांकि इसी वीटो शक्ति को लेकर संयुक्त राष्ट्र की आलोचना भी होती रही है, क्योंकि कई बार बड़े अंतरराष्ट्रीय संकटों पर सुरक्षा परिषद कोई निर्णायक कदम नहीं उठा पाती।
संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर के मैनहट्टन इलाके में स्थित है। यहां महासभा, सुरक्षा परिषद और संगठन के दूसरे महत्वपूर्ण निकायों की बैठकें होती हैं। हालांकि मुख्यालय अमेरिका की जमीन पर स्थित है, लेकिन यह संयुक्त राष्ट्र का अंतरराष्ट्रीय परिसर है। इसके कामकाज को संयुक्त राष्ट्र और मेजबान देश अमेरिका के बीच हुए विशेष समझौतों के तहत संचालित किया जाता है। दुनिया भर के राजनयिक यहां वैश्विक समस्याओं पर चर्चा करने और समाधान खोजने के लिए जुटते हैं।
संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाएं अरबी, चीनी, अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी और स्पेनिश हैं। इन भाषाओं के जरिए सदस्य देशों के प्रतिनिधि संगठन की प्रमुख बैठकों और कामकाज में हिस्सा लेते हैं। इनका उद्देश्य अलग अलग भाषाएं बोलने वाले देशों के बीच संवाद को आसान बनाना है। हालांकि दुनिया में हजारों भाषाएं बोली जाती हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के आधिकारिक भाषा ढांचे में इन्हीं छह भाषाओं को मान्यता मिली हुई है।
संयुक्त राष्ट्र के दूसरे महासचिव डैग हैमरशोल्ड की सितंबर 1961 में विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी। वह अफ्रीकी देश कांगो में जारी संकट के समाधान के लिए कूटनीतिक मिशन पर जा रहे थे। उनका विमान उत्तरी रोडेशिया के इलाके में दुर्घटनाग्रस्त हुआ था, जो आज जाम्बिया का हिस्सा है। उनकी मौत ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था। हैमरशोल्ड को अंतरराष्ट्रीय शांति स्थापित करने के प्रयासों के लिए याद किया जाता है और उन्हें मरणोपरांत नोबेल शांति पुरस्कार भी दिया गया था।
10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा को अपनाया था। इसका उद्देश्य यह स्थापित करना था कि हर इंसान को जन्म से ही कुछ बुनियादी अधिकार और स्वतंत्रताएं प्राप्त हैं। इसमें जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांत शामिल हैं। यह घोषणा अपने आप में हर देश पर बाध्यकारी संधि नहीं है, लेकिन इसने दुनिया भर में मानवाधिकारों से जुड़े कानूनों, नीतियों और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को गहराई से प्रभावित किया। बाद में इसका अनुवाद 500 से अधिक भाषाओं में किया गया।
संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों को उनके योगदान के लिए 1988 में नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। यह सम्मान उन शांति सैनिकों के प्रयासों को मान्यता देने के लिए था, जिन्होंने संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में तनाव कम करने और शांति समझौतों को लागू कराने में भूमिका निभाई। इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थियों से जुड़ी एजेंसी और अन्य संस्थाओं को भी अलग अलग वर्षों में नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है। यह इस बात का संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय शांति और मानवीय सहायता के क्षेत्र में संगठन की भूमिका कितनी व्यापक रही है।