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ईरान-इजरायल जंग से भारत ने सीखा 'विजय मंत्र', 2026 तक अभेद्य होगा आसमान, क्या है तीनों सेनाओं का मास्टर प्लान?

India Defense News: मध्य पूर्व में जारी युद्ध से सबक लेते हुए भारतीय सेनाएं खुद को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार कर रही हैं। 2026 तक शुरू होने वाला IACCS सिस्टम भारत की रक्षा दीवार को अभेद्य बना देगा।

सजल रघुवंशी

India Defense Learning From Iran War: दुनिया इस समय युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। रूस-यूक्रेन के बाद अब मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी जंग ने आधुनिक युद्ध के तौर-तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है। इन वैश्विक संघर्षों पर भारतीय रक्षा विशेषज्ञ पैनी नजर बनाए हुए हैं। भारत अब अपनी सैन्य क्षमताओं को केवल आधुनिक हथियारों तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि तीनों सेनाओं- थल सेना, नौसेना और वायुसेना के बीच तालमेल को 'सुपरफास्ट' बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

ईरान युद्ध से क्या मिला सबक?

मध्य पूर्व के युद्ध में जिस तरह से ड्रोन, मिसाइल और हवाई हमलों की बौछार देखी गई, उसने साबित कर दिया है कि भविष्य के युद्ध 'हवाई श्रेष्ठता' पर टिके होंगे। भारत ने इस युद्ध से सबसे बड़ा सबक यह लिया है कि हवाई रक्षा और कमांड सिस्टम के बीच पलक झपकते ही तालमेल होना अनिवार्य है। इसी क्रम में, भारत 'इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम' (IACCS) को तेजी से विकसित कर रहा है।

IACCS: भारत का डिजिटल रक्षा कवच

IACCS एक अत्यंत उन्नत और ऑटोमेटिक कमांड-कंट्रोल नेटवर्क है। यह सिस्टम केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि एक ऐसा 'दिमाग' है जो ग्राउंड रडार, हवाई चेतावनी विमान (AEW&C) और फाइटर जेट्स से मिलने वाले डेटा को एक ही जगह इकट्ठा करेगा। इससे कमांडर्स को पूरे देश की हवाई स्थिति का एक साफ और सजीव नक्शा दिखाई देगा। सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इस सिस्टम को तैयार कर रही है और लक्ष्य है कि 2026 तक इसे पूरी तरह चालू कर दिया जाए।

'फ्रेंडली फायर' की गलतियों पर लगेगा विराम

युद्ध की अफरातफरी में अक्सर 'फ्रेंडली फायर' यानी अपनी ही सेना द्वारा गलती से अपने ही विमानों या सैनिकों पर हमला करने की घटनाएं होती हैं। ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी F-15 फाइटर जेट्स के साथ हुई घटनाओं और कुवैत जैसी स्थितियों से बचने के लिए IACCS संजीवनी साबित होगा। यह सिस्टम दुश्मन और दोस्त की पहचान (IFF) करने में माहिर है, जिससे किसी भी तरह की मानवीय या तकनीकी चूक की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।

C-130J (स्त्रोत- सोशल मीडिया)

संयुक्त थिएटर कमांड: एक सेना, एक लक्ष्य

भारत अब 'संयुक्त थिएटर कमांड' (Joint Theatre Commands) की ओर बढ़ रहा है। वर्तमान में तीनों सेनाएं अलग-अलग कमांड के तहत काम करती हैं, लेकिन नए ढांचे में भौगोलिक आधार पर तीनों सेनाएं एक ही कमांडर के अधीन काम करेंगी। उदाहरण के तौर पर, उत्तरी थिएटर चीन के खिलाफ और पश्चिमी थिएटर पाकिस्तान के खिलाफ मोर्चा संभालेगा। IACCS इस संयुक्त थिएटर कमांड की रीढ़ की हड्डी बनेगा, जो हवाई क्षेत्र में तीनों सेनाओं को एकजुट ताकत प्रदान करेगा।

थल सेना के 'अकाशतीर' से जुड़ाव

ऐसा कहा जा रहा है कि तालमेल को और गहरा करने के लिए IACCS को भारतीय सेना के 'अकाशतीर' सिस्टम के साथ भी एकीकृत किया जाएगा। इसका मतलब है कि अगर जमीन से कोई मिसाइल दागी जानी है या आसमान से किसी फाइटर जेट को हमला करना है, तो दोनों के पास एक ही जानकारी होगी। ग्रुप कैप्टन (रिटायर्ड) अनुपम बनर्जी के अनुसार, भारत अब हर बदलती स्थिति से सीख रहा है और तीनों सेनाओं के लिए एक ही स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया जा रहा है।

भविष्य की तैयारी और क्षेत्रीय संदेश

जब IACCS और संयुक्त थिएटर कमांड पूरी तरह प्रभावी होंगे, तब भारत की रक्षा व्यवस्था दुनिया की सबसे बेहतरीन प्रणालियों में से एक होगी। यह न केवल युद्ध के समय त्वरित निर्णय लेने में मदद करेगा, बल्कि दुश्मन के लिए भारत की सीमाओं में घुसना नामुमकिन बना देगा। भारत के ये कदम पड़ोसी देशों को भी एक कड़ा संदेश दे रहे हैं कि भारतीय रक्षा प्रणाली अब न केवल आधुनिक है, बल्कि अत्यधिक एकीकृत और आक्रामक भी है।

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