PM Modi Bilateral Meetings: भारत की अध्यक्षता में आयोजित 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026' न केवल तकनीक बल्कि कूटनीति का भी एक बड़ा केंद्र बन गया है। इस शिखर सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक नेताओं के साथ मुलाकातों का सिलसिला जारी रखा जिसमें एआई (AI) के लोकतंत्रीकरण और द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का संकल्प लिया गया। पीएम मोदी ने स्लोवाकिया के राष्ट्रपति, लिकटेंस्टीन के प्रिंस, श्रीलंका के राष्ट्रपति और संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं कीं।
प्रधानमंत्री मोदी और स्लोवाकिया गणराज्य के राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी के बीच हुई मुलाकात बेहद खास रही। विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, डिजिटल टेक्नोलॉजी, रक्षा, अंतरिक्ष, ऊर्जा और संस्कृति सहित द्विपक्षीय संबंधों के पूरे स्पेक्ट्रम की समीक्षा की। दोनों देशों ने विशेष रूप से डिजिटल क्षेत्र में आपसी लाभ के लिए संबंधों को और मजबूत करने पर सहमति जताई। नेताओं ने 'भारत-ईयू संयुक्त व्यापक रणनीतिक एजेंडा 2030' को अपनाने से संबंधों में आई नई तेजी का भी स्वागत किया।
समिट के दौरान तकनीक के मानवीय पक्ष पर जोर देते हुए स्लोवाकिया के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी को एक सफल आयोजन के लिए बधाई दी। उन्होंने 'एक्स' पर पोस्ट किया कि एआई को इस तरह से विकसित किया जाना चाहिए कि इसका लाभ केवल कुछ चुनिंदा लोगों को नहीं, बल्कि आम जनता को भी मिले। दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि नवाचार, सुरक्षित तकनीक और ऊर्जा क्षेत्र में अकादमिक विशेषज्ञों के आदान-प्रदान के माध्यम से गहरे सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
पीएम मोदी ने लिकटेंस्टीन के वंशानुगत राजकुमार, एलोइस फिलिप मारिया के साथ भी द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। इस वार्ता का मुख्य केंद्र भारत-ईएफटीए समझौते के तहत व्यापार, निवेश और एआई जैसी नई तकनीकों में सहयोग बढ़ाना था। इसके अलावा, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच भविष्य की योजनाओं पर चर्चा हुई।
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शिखर सम्मेलन के मौके पर पीएम मोदी ने यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके से भी मुलाकात की। यूएन प्रमुख के साथ वार्ता में वैश्विक विकास और विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय प्रगति पर चर्चा हुई जबकि श्रीलंकाई राष्ट्रपति के साथ संबंधों को और प्रगाढ़ करने पर ध्यान दिया गया। यह समिट स्पष्ट करती है कि भारत न केवल एआई के क्षेत्र में नवाचार का नेतृत्व कर रहा है बल्कि सुरक्षित और समावेशी तकनीक के लिए दुनिया को एक मंच पर भी ला रहा है।