आईएमए ने पीएम मोदी को लिखा पत्र (सोर्स:-सोशल मीडिया) 
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डॉक्टर हत्या मामले में IMA ने पीएम मोदी को लिखा पत्र, सुरक्षा के साथ-साथ रखी ये मांगे

कोलकाता में हुए ट्रेनी डॉक्टर हत्या मामले में पीडिता को न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे आईएमए ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर डॉक्टर्स की सुरक्षा के साथ-साथ कई सारी मांगे रखी है। इसके साथ ही आईएमए ने कहा कि प्रदर्शन अभी जारी रहेगा।

शुभम पाठक

नई दिल्ली: कोलकाता में डॉक्टर हत्या मामल में प्रतिदिन कुछ नया देखने को मिलता है, पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए लगातार प्रदर्शन कर रहे इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। जिसमें डॉक्टर्स की सुरक्षा के साथ-साथ कई सारी मांगे रखी।

पीड़िता को न्याय दिलाना के लिए प्रदर्शन कर रहा आईएमए ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में कहा कि 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज की एक पोस्ट ग्रेजुएट छात्रा के साथ ड्यूटी के दौरान बेरहमी से बलात्कार किया गया और उसकी हत्या कर दी गई। इस घटना ने चिकित्सा जगत और पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।

पीएम मोदी से IAM ने की ये मांग 

1. पीएम मोदी को लिखे पत्र में आईएमए ने पहली मांग रखी कि, पीड़ित 36 घंटे की ड्यूटी शिफ्ट कर रहा था, इसलिए आराम करने के लिए सुरक्षित स्थानों के साथ-साथ रेस्ट रूम की कमी के कारण रेजिडेंट डॉक्टरों के काम करने और रहने की स्थिति में व्यापक बदलाव की जरूरत है।

2.आईएमए ने दूसरी मांग रखी की, किसी अपराध की निश्चित समय सीमा के भीतर सावधानीपूर्वक और पेशेवर तरीके से जांच की जानी चाहिए और न्याय मिलना चाहिए।

3. सभी अस्पतालों के सुरक्षा प्रोटोकॉल एयरपोर्ट से कम नहीं होने चाहिए। अस्पतालों को अनिवार्य सुरक्षा अधिकारों के साथ सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाना चाहिए। अस्पतालों में सीसीटीवी, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती और प्रोटोकॉल का पालन किया जाना चाहिए।

4. शोक संतप्त परिवार को उचित और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाना चाहिए।

5. महामारी रोग अधिनियम 1897 (स्वास्थ्य कर्मियों और क्लीनिकल प्रतिष्ठानों में हिंसा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रतिषेध विधेयक-2019) में 2020 के संशोधनों को मसौदे में शामिल कर केंद्रीय अधिनियम बनाया जाए। इससे 25 राज्यों को मजबूती मिलेगी।

आईएमए ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में आगे लिखा कि 15 अगस्त को एक भीड़ ने अस्पताल में तोड़फोड़ की, जिसमें घटनास्थल समेत अस्पताल के कई हिस्सों में तोड़फोड़ की गई। पेशे की प्रकृति के कारण डॉक्टर, खासकर महिला डॉक्टर, हिंसा की चपेट में आती हैं। अस्पतालों और परिसर के अंदर डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अधिकारियों का काम है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना ने अस्पताल में हिंसा को सामने ला दिया है।

इसेक साथ ही पत्र में आगे लिखा कि महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थानों की कमी के कारण बड़े पैमाने पर अपराध हो रहे हैं। सुरक्षा प्रोटोकॉल की कमी के कारण गुंडागर्दी होती है। इस अपराध और बर्बरता ने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर दिया है। देश भर में डॉक्टरों ने आज केवल आपात स्थिति में ही सेवाएं दीं।

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