Centre Extented AFSPA: गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड के कुछ हिस्सों में 'आर्म्ड फोर्सेज (स्पेशल पावर्स) एक्ट 1958' यानी अफ्सपा (AFSPA) को 31 मार्च, 2027 तक छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। साथ ही, इस एक्ट के तहत "अशांत क्षेत्र" घोषित किए गए पुलिस स्टेशनों और जिलों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मणिपुर में कुकी और नागा समुदायों के बीच झड़पों के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब बनी हुई है। पिछले कुछ दिनों में कांगपोकपी जिले के नागा गांवों में कई घर जला दिए गए हैं।
हालांकि सरकार ने कई इलाकों को AFSPA के दायरे से बाहर रखा गया है, उनमें इम्फाल पश्चिम जिले के इम्फाल, लैम्फेल, सिटी, सिंगजामेई, पटसोई और वांगोई पुलिस स्टेशन; इम्फाल पूर्व जिले के पोरॉपैट, हिंगांग और इरीलबांग पुलिस स्टेशन; थोउबल जिले का थोउबल पुलिस स्टेशन; बिष्णुपुर जिले के बिष्णुपुर और नामबोल पुलिस स्टेशन; और का कचिंग जिले का काकचिंग पुलिस स्टेशन शामिल हैं। AFSPA उन इलाकों में तैनात सशस्त्र बलों को बिना वारंट के तलाशी लेने, जब्ती करने और गिरफ्तार करने की शक्ति देता ।
नागा संगठन ने आरोप लगाया कि यह हमला कुकी नेशनल आर्मी बर्मा के सदस्यों और म्यांमार स्थित पीपल्स डिफेंस फोर्स के समर्थन वाले कुकी उग्रवादियों ने किया। आरोप है कि अत्याधुनिक हथियारों से लैस एक कुकी आतंकी समूह ने म्यांमार के फाइलन कुकी गांव से नाम्या नदी पार की और पिलोंग के नागरिकों पर हिंसक हमला किया। बयान के अनुसार, गांव के पास दो निवासियों की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जबकि दो अन्य लोगों को कथित तौर पर पास के फाइलन ले जाकर हमलावरों ने मार डाला। इसे देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्य के पांच जिलों के 13 पुलिस स्टेशनों को छोड़कर पूरे राज्य के लिए "अशांत क्षेत्र" का दर्जा 1 अक्टूबर से छह महीने के लिए बढ़ा दिया है।
पूर्वोत्तर राज्यों और जम्मू कश्मीर में विपरीत स्थिति में कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए यह कानून सरकार को शक्ति देती है। अफस्पा के तहत 'अशांत क्षेत्र' में शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए सशस्त्र बलों को विशेष अधिकार मिल जाता है। यह कानून सशस्त्र बलों को कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को चेतावनी देने के बाद बल प्रयोग करने यहां तक कि गोली चलाने का अधिकार देता है।