Himanta Biswa Sarma On Gaurav Gogoi Jail Comment: असम कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई द्वारा दिए गए विवादित बयान पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ा पलटवार किया है। गोगोई के उस दावे पर, जिसमें उन्होंने कहा था कि 'राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनते ही हिमंत को जेल भेजा जाएगा।
मुख्यमंत्री सरमा ने सवाल उठाया कि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है, तो राहुल गांधी अभी प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं। सरमा ने तंज कसते हुए कहा कि वह कांग्रेस से इस चमत्कार का फॉर्मूला जानना चाहते हैं।
असम के मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब भी चुनाव आते हैं, गौरव गोगोई और राहुल गांधी केवल जेल की बातें करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव का अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है और 'जेल में बंद कैदी नहीं, बल्कि आम मतदाता वोट देते हैं'।
गौरतलब है कि आगामी चुनावों से पहले असम में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक जुबानी जंग तेज हो गई है, जहां कांग्रेस सरकार को कानूनी घेरे में लेने की कोशिश कर रही है, वहीं हिमंत सरमा विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने गोगोई के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगला लोकसभा चुनाव 2029 में होना है, ऐसे में अभी से राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की बात कैसे की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि अगले नौ महीनों में कोई चुनाव नहीं है और वह यह जानना चाहते हैं कि चुनाव कब और कैसे होगा। वह प्रधानमंत्री कैसे बन सकते हैं?"
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि जब भी चुनाव का समय आता है, गौरव गोगोई और राहुल गांधी की ओर से जेल की बात की जाती है।
उन्होंने कहा कि किसी भी चुनाव का फैसला जेल में बंद लोगों से नहीं, बल्कि आम मतदाताओं से होता है। सरमा ने कहा, “जेल में बंद कैदी वोट नहीं देते। आम जनता वोट देती है।” उन्होंने नेताओं से जनता के बीच जाकर उनके मुद्दों पर बात करने की अपील की।
असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने गुरुवार को दावा किया था कि अगर राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री बनते हैं, तो मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ अगले ही दिन मामला दर्ज किया जाएगा और उसके बाद उन्हें जेल भेजा जाएगा।
गोगोई के इस बयान के बाद मुख्यमंत्री सरमा ने प्रतिक्रिया दी है। असम में भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी के बीच दोनों नेताओं के ये बयान सामने आए हैं।
मुख्यमंत्री सरमा ने अपनी प्रतिक्रिया में राजनीतिक और कानूनी आरोपों के बजाय विकास और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों को चुनावी चर्चा का केंद्र बनाने पर जोर दिया।
वहीं, कांग्रेस की ओर से राज्य सरकार के खिलाफ राजनीतिक और कानूनी मुद्दे उठाए जा रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच जारी बयानबाजी ने असम की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान को फिर सामने ला दिया है।