डी.वाई. चंद्रचूड़, (पूर्व सीजेआई) 
देश

जब तक जुर्म साबित न हो, जमानत पाना आरोपी का अधिकार; उमर खालिद मामले पर पूर्व CJI चंद्रचूड़ का बड़ा बयान

DY Chandrachud: पूर्व CJI ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में मामलों के निस्तारण में देरी एक बड़ी समस्या है। यदि न्यायिक प्रक्रिया में देरी हो रही है, तो आरोपी को जमानत मिलना चाहिए।

मनोज आर्या

Former CJI Dy Chandrachud on Umar Khalid: देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डी. वाय. चंद्रचूड़ ने रविवार को जयपुर साहित्य उत्सव में कहा कि दोष सिद्ध होने से पहले जमानत हर आरोपी का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने यह बात वरिष्ठ पत्रकार वीर संघवी के सवाल के जवाब में कही, जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा उमर खालिद की दिल्ली दंगों की साजिश मामले में जमानत अस्वीकृत करने पर चर्चा हुई।

पूर्व CJI ने कहा कि भारतीय कानून का आधार निर्दोष होने का अनुमान है। यदि कोई व्यक्ति पांच या सात साल तक जेल में रहे और बाद में बरी हो जाए, तो खोए हुए सालों की भरपाई नहीं हो सकती। जमानत केवल तब रोकी जा सकती है जब आरोपी अपराध दोबारा कर सकता हो, सबूतों में छेड़छाड़ कर सकता हो या कानून से बचने के लिए जमानत का फायदा उठा सकता हो।

'कई साल जेल में रह जाते लोग'

पूर्व सीजेआई ने कहा कि जहां राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला हो, वहां अदालत को केस की गहन जांच करनी चाहिए। अन्यथा लोग कई साल जेल में रह जाते हैं। उन्होंने जमानत मामलों में जिला और सेशन कोर्ट द्वारा अस्वीकार किए जाने को चिंता का विषय बताया और कहा कि यही कारण है कि ये मामले सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचते हैं।

जस्टिस सिस्टम में देरी बड़ी समस्या

पूर्व CJI ने कहा कि भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में मामलों के निस्तारण में देरी एक बड़ी समस्या है। यदि न्यायिक प्रक्रिया में देरी हो रही है, तो आरोपी को जमानत मिलना चाहिए। उन्होंने अपने कार्यकाल में कई अहम फैसलों का उल्लेख किया, जैसे महिलाओं को सशस्त्र बलों में स्थायी कमीशन, समलैंगिकता का अपराध नहीं मानना और चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करना।

न्यायपालिका में पारदर्शिता और सुधार

चंद्रचूड़ ने सुझाव दिया कि उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए सिविल सोसाइटी के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी शामिल किया जाए, ताकि न्यायपालिका में पारदर्शिता बढ़े और जनता का विश्वास मजबूत हो। पूर्व CJI ने बताया कि सेवानिवृत्ति के बाद वे निजी जीवन का आनंद ले रहे हैं और किसी पद को स्वीकार नहीं करते। उन्होंने कहा कि आज भी वैवाहिक बलात्कार को अपराध के रूप में शामिल नहीं किया गया है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है।

लोगों के लिए न्यायालय बनाने के प्रयास

बातचीत के दौरान पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का लाइव प्रसारण शुरू किया, जो केवल हिंदी में नहीं बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध सभी भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध है।

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