Election Commission Meeting: चुनाव आयोग में मतभेद के खुलासे और उसको लेकर चल रहे विवाद के बीच दिल्ली में चुनाव आयोग की बैठक हो रही है। इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद हैं। भारत निर्वाचन आयोग ने कहा है कि कैबिनेट सेक्रेटरी को लिखा गया पत्र किसी कमीशन या IT डिवीजन की पॉलिसी से जुड़ा हुआ नहीं था।
चुनाव आयोग की यह बैठक ऐसे वक्त में हुई है जब हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के सामने आईं। जिसमें कहा गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार चुनाव आयोग के फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनकी जानकारी या सिफारिश के बगैर लिए गए थे।
चुनाव आयोग (ECI) की ओर से शनिवार (26 सितंबर, 2026) को जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों ने आम सहमति से कई अहम फैसले लिए। इनमें प्रमुख फैसले इस प्रकार हैं-
SIR में नोटिस पाने वाले लोगों के घर BLO दस्तावेज लेने जाएंगे। आम तौर पर सुनवाई की जरूरत नहीं होगी।
DEO जरूरत के अनुसार रैन बसेरों, मजदूरों, गरीबों और बेघरों के लिए हेल्प डेस्क लगाएंगे।
SIR में फॉर्म-6 के साथ घोषणा-पत्र की व्यवस्था को सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा है।
ECINET की समीक्षा वरिष्ठ DEC और स्वतंत्र IIT/IIM विशेषज्ञों की समिति करेगी।
दिल्ली में दावे-आपत्तियों की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर और महाराष्ट्र में 12 अक्टूबर तय की गई है।
आयोग की सभी बैठकों का एजेंडा पहले भेजा जाएगा और बैठक की कार्यवाही भी जारी की जाएगी।
सभी अधिकारियों की APAR रिपोर्ट हर साल निर्धारित समय सीमा यानी 31 दिसंबर तक पूरी की जाएगी।
अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए अब चुनाव आयोग की मंजूरी जरूरी होगी।
आयुक्तों की ओर से अधिकारियों को जारी सभी निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।
बता दें कि अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति दर्ज कराई थी, जो उनकी जानकारी के बिना लिए गए थे।
दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों में वोटर रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म 6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने के तरीके और वोटर लिस्ट डेटाबेस पर सेंट्रलाइज़्ड कंट्रोल का मुद्दा शामिल था।