सांकेतिक तस्वीर (Image- Social Media) 
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Eid Ul Fitr 2026: देशभर में आज मनाई जा रही ईद, कितना दिया जाता है जकात और फितरा?

Zakat And Fitra Difference: आज धूमधाम से ईद-उल-फितर का त्योहार मनाया जा रहा है। ईद का यह पर्व ना केवल इबादत का संदेश देता है बल्कि समाज में एकता, प्रेम और दान की भावना को भी मजबूत करता है।

अर्पित शुक्ला

Eid Ul Fitr 2026: देशभर में आज खुशी और भाईचारे का पर्व ईद-उल-फितर बड़े उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। एक महीने के रोज़ों के बाद लोग मस्जिदों में नमाज़ अदा करते हैं, गले मिलते हैं और एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं। मस्जिदों और ईदगाहों में नमाज़ के समय पहले ही तय कर दिए गए हैं। ईद के दिन की शुरुआत खास नमाज़ से होती है, जिसे ‘ईद की नमाज़’ कहा जाता है, और इसे खुले मैदानों या मस्जिदों में अदा किया जाता है।

नमाज़ के बाद लोग एक-दूसरे को गले लगाकर “ईद मुबारक” कहते हैं। इस दिन नए कपड़े पहनने की परंपरा है और घरों में तरह-तरह के खास पकवान बनाए जाते हैं। साथ ही, जकात और फितरा देना भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

जकात और फितरा देना एक धार्मिक जिम्मेदारी

आज का दिन मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद खास होता है। यह त्योहार पवित्र महीने रमजान के अंत में मनाया जाता है, जिसमें पूरे महीने रोज़े रखे जाते हैं। ईद खुशी, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है, जब लोग मिलकर खुशियां बांटते हैं। यह दिन जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति और सहायता का संदेश भी देता है। इसी कारण जकात और फितरा देना एक अहम धार्मिक जिम्मेदारी मानी जाती है, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोग भी इस खुशी में शामिल हो सकें।

क्या है जकात?

इस्लाम में जकात को फर्ज यानी अनिवार्य दान माना गया है। यह उन मुसलमानों पर लागू होता है जिनकी संपत्ति एक निश्चित सीमा (निसाब) से अधिक होती है। आमतौर पर जकात अपनी कुल बचत का 2.5 प्रतिशत दी जाती है। यह साल में एक बार दी जाती है और इसका उद्देश्य गरीबों, जरूरतमंदों और समाज के कमजोर वर्ग की मदद करना होता है।

क्या है फितरा?

फितरा, जिसे सदका-ए-फित्र भी कहा जाता है, हर मुसलमान के लिए जरूरी होता है, चाहे वह अमीर हो या साधारण स्थिति में हो (यदि उसके पास जरूरत से थोड़ा अधिक है)। इसे ईद की नमाज़ से पहले दिया जाता है, ताकि कोई भी व्यक्ति त्योहार के दिन भूखा न रहे। इसकी राशि आमतौर पर एक व्यक्ति के एक दिन के भोजन के बराबर मानी जाती है, जो भारत में लगभग 70 से 150 रुपये या उससे अधिक हो सकती है, जो स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

जकात और फितरा में अंतर

जकात और फितरा में मुख्य अंतर इनके समय और उद्देश्य में है। जकात साल में एक बार दी जाती है और यह आर्थिक संतुलन बनाए रखने का माध्यम है, जबकि फितरा खासतौर पर ईद-उल-फितर से पहले दिया जाता है, ताकि हर व्यक्ति त्योहार के दिन खुश रह सके और कोई भी भूखा न रहे।

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