पहली बार कब मनाई गई थी ईद? ईद की पहली नमाज़ किसने पढ़ी थी? यहां जानिए

Eid Ul Fitr History: जानिए ईद पहली बार कब मनाई गई थी और पहली ईद की नमाज़ किसने अदा की थी। इस विवरण से आपको ईद की शुरुआत और महत्व की पूरी जानकारी मिलेगी।
Eid Ul Fitr Kyon Manai Jati Hai,
ईद (सौ.सोशल मीडिया)
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Eid Ul Fitr Kyon Manai Jati Hai : मुस्लिम धर्म का पाक महीना रमजान अब अपने अंतिम दौर पर है और अब सबकी निगाहें आसमान में दिखने वाले चांद पर टिकी हैं चांद देखने के बाद मुसलमानों का सबसे बड़ा त्योहार ईद उल फित्र का त्योहार मनाया जाता है।

इस्लामिक धर्म गुरु के अनुसार, रमजान के 30 रोजे रखने के बाद ईद का जश्न मनाया जाता है। इस बार ईद का चांद का 20 मार्च को दिखाई देने की संभावना है और 21 मार्च यानी शनिवार को देशभर त्योहार मनाया जाएगा।

मुस्लिम धर्म में रमजान क्या है? मतलब

सबसे पहले जान लेते हैं कि रमजान क्या है? इस्लामिक धर्म गुरु के मुताबिक, रमजान अरबी कैलेंडर के एक महीने का नाम है। अरबी या फिर हिजरी कैलेंडर चांद के हिसाब से चलता है। चांद दिखने के बाद रोजे रखने की शुरुआत होती है और फिर चांद देखने के बाद ही रोजे रखने बंद कर दिए जाते हैं और अगले दिन यानी रमजान के अगले महीने (शव्वाल) के पहले दिन ईद उल फित्र का त्योहार मनाया जाता है।

पहली बार कब मनाई गई थी ईद

ईद के त्योहार के बारे में सारी दुनिया जानती है कि ईद रमजान के बाद मनाई जाती है।लेकिन क्या जानते है कि, सबसे पहले ईद का त्योहार कब मनाया गया था? पैगंबर हजरत मोहम्मद (स.) ने सन 622 में मक्का से मदीना के लिए हिजरत की थी। इसी दिन से हिजरी कैलेंडर की शुरुआत हुई थी। हालांकि यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सन 638 के आस-पास हजरत उमर फारूक ने कैलेंडर की शुरुआत की थी और वो शुरुआत पैगंबर मोहम्मद साहब की हिजरत के दिन से शुरू की गई।

हिजरी कैलेंडर चंद्रमा के अनुसार चलता

इस्लामिक धर्म गुरु बताते है कि, हिजरी कैलेंडर चंद्रमा के अनुसार चलता है, जिसमें हर महीना चांद दिखने से शुरू होता है। इसमें एक साल में 354 या 355 दिन होते हैं और कुल 12 महीने होते हैं। इसका पहला महीना मुहर्रम और आखिरी महीना जिलहिज्जा होता है, जिसमें ईद उल अजहा मनाई जाती है।

कब पढ़ी गई ईद की पहली नमाज?

जानकारों के अनुसार, ईद की नमाज पहली बार पैगंबर मोहम्मद साहब की हिजरत के दूसरे साल अदा की गई थी। सन 2 हिजरी में खुद पैगंबर मोहम्मद साहब ने ईद की नमाज पढ़ाई थी, यानी मक्का से मदीना हिजरत के बाद दूसरी बार ईद उल फित्र का त्योहार मनाया गया।

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