ED Action In Drugs Case: प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने धनशोधन मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए हैदराबाद और मंदसौर में 90 लाख रुपये से अधिक की अचल संपत्तियां कुर्क कर ली हैं। इसके साथ ही एजेंसी ने पीएसीएल धोखाधड़ी मामले में इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट लिमिटेड के 42.13 करोड़ रुपये मूल्य के 29,46,341 इक्विटी शेयरों को भी कुर्क किया है।
यह पूरी कार्रवाई नशीली दवाओं की अवैध तस्करी और सामूहिक निवेश योजना में हुई बड़ी वित्तीय अनियमितताओं की जांच के सिलसिले में की गई है। ED की इस सख्त कूटनीतिक और कानूनी कार्रवाई से वित्तीय अपराधों में लिप्त आरोपियों पर शिकंजा और अधिक कस गया है।
प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने नशीली दवाओं की तस्करी और PACL इन्वेस्टमेंट फ्रॉड से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने हैदराबाद और मध्य प्रदेश के मंदसौर में स्थित 90 लाख रुपये से अधिक मूल्य की इमूवेबल प्रॉपर्टीज को कुर्क किया है।
ED के इंदौर सब जोनल ऑफिस ने नारकोटिक्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में यह कार्रवाई की। वहीं, PACL लिमिटेड और उससे जुड़ी इंस्टीट्यूशंस के खिलाफ चल रही जांच में दिल्ली जोनल ऑफिस ने भी प्रॉपर्टीज और शेयर्स पर कार्रवाई की है।
PACL फ्रॉड मामले में ED ने इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट लिमिटेड के 29,46,341 इक्विटी शेयर्स को कुर्क किया है। इन शेयर्स का मौजूदा मार्केट वैल्यू करीब 42.13 करोड़ रुपये बताया गया है।
जांच के दौरान एजेंसी को कथित तौर पर पता चला कि इन्वेस्टर्स से जुटाई गई बड़ी रकम को इन शेयर्स में लगाया गया था। ED के मुताबिक, इस पूरी प्रोसेस का उद्देश्य कथित अपराध से हासिल रकम को छिपाना और उसे अलग-अलग फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस के जरिए व्यवस्थित करना था।
PACL मामला कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम से जुड़ी कथित फाइनेंशियल इर्रेग्युलैरिटीज और इन्वेस्टर्स के साथ फ्रॉड की जांच का हिस्सा है। इस मामले में ED पहले भी बड़ी मात्रा में मूवेबल और इमूवेबल प्रॉपर्टीज पर कार्रवाई कर चुका है।
मंदसौर से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में करीब 70 करोड़ रुपये मूल्य की मेफेड्रोन यानी MD ड्रग्स की कथित तस्करी से क्राइम की इनकम अर्जित करने का आरोप है। मामला नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटांसेज एक्ट, 1985 के तहत दर्ज FIR से शुरू हुआ था।
इंदौर क्राइम ब्रांच ने वेद प्रकाश व्यास, दिनेश अग्रवाल, अक्षय अग्रवाल और अन्य आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज की थी। इसके आधार पर ED ने PMLA के तहत अपनी जांच आगे बढ़ाई।
जांच में आरोप है कि आरोपी सामान्य बिजनेस की आड़ में बड़े पैमाने पर नशीली दवाओं की सप्लाई और तस्करी में शामिल थे। इसी मामले में ED ने 17 जुलाई को इंदौर और मंदसौर में कई ठिकानों पर सर्च ऑपरेशन चलाया था।
नशीली दवाओं की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED ने तीन मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। एजेंसी अब कैश ट्रांजैक्शंस, बैंक अकाउंट्स और प्रॉपर्टीज से जुड़े डॉक्यूमेंट्स की जांच कर रही है।
ED के अनुसार, दोनों मामलों में अन्य लोगों और सहयोगियों की भूमिका की भी जांच जारी है। एजेंसी का फोकस कथित अपराध से अर्जित रकम, उससे जुड़ी प्रॉपर्टीज और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शंस का पता लगाने पर है।