दिल्ली में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के बीच बड़े नामों को नोटिस मिलने का मामला चर्चा में है। पूर्व राजनयिक दीपक वोहरा और उनकी पत्नी के अलावा कई पूर्व और मौजूदा बड़े अधिकारियों, नेताओं और सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों के नाम भी नोटिस सूची में सामने आए हैं। इनमें चुनाव आयुक्त डॉ. एसएस संधू का नाम भी शामिल है।
नोटिस सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर इन लोगों को नोटिस क्यों भेजे गए? चुनाव आयोग ने एसएस संधू के मामले में स्पष्ट किया है कि उनकी मतदाता सूची में नाम को लेकर नाम की विसंगति पाई गई थी। दस्तावेजों के सत्यापन के बाद उनकी एंट्री को वैलिडेट कर दिया गया है और अंतिम मतदाता सूची में उनका नाम शामिल किया जाएगा।
दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र-38 के निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) ने एसएस संधू के मामले में स्पष्टीकरण जारी किया है। अधिकारी के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान संधू की वोटर एंट्री में 'Discrepancy in Name' यानी नाम से जुड़ी विसंगति पाई गई थी।
यह विसंगति पिछली मतदाता सूची से लिंकिंग की प्रक्रिया के दौरान सामने आई। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत ऐसे मतदाताओं को नोटिस जारी किया जाता है, जिनकी एंट्री पिछली रिवीजन की सूची से लिंक नहीं हो पाती या लिंकिंग के दौरान कोई तार्किक विसंगति सामने आती है।
ERO के मुताबिक, एसएस संधू ने नोटिस के जवाब में जरूरी तथ्य और दस्तावेज उपलब्ध कराए। इनका सत्यापन किया गया और उनकी वोटर एंट्री को वैलिडेट कर दिया गया है।
आयोग के अनुसार, उनका नाम 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली दिल्ली कैंट विधानसभा क्षेत्र की अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए रखा गया है। यानी उन्हें मिला नोटिस अपने आप में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का आदेश नहीं था।
SIR के दौरान सिर्फ एसएस संधू ही नहीं, बल्कि कई प्रमुख लोगों की वोटर एंट्री में विसंगतियां सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक विदेश मंत्री एस. जयशंकर, पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, SEBI चेयरमैन तुहिन कांत पांडे, विदेश सचिव विक्रम मिस्री, पूर्व नीति आयोग उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया और पूर्व JNU कुलपति एम. जगदीश कुमार जैसे नाम भी नोटिस सूची में शामिल हैं।
एसएस संधू के मामले में नाम की स्पेलिंग से जुड़ी विसंगति बताई गई है। वहीं अलग-अलग लोगों के मामलों में 'नो मैपिंग', नाम या अन्य विवरण में अंतर जैसी वजहें सामने आई हैं।
दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने साफ किया है कि SIR के दौरान नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है।
अधिकारी के मुताबिक, किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे अपना पक्ष रखने और जरूरी दस्तावेज जमा करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद उचित प्रक्रिया के तहत आदेश पारित किया जाएगा।
दिल्ली में जारी SIR के दौरान करीब 33.13 लाख मतदाताओं को नोटिस दिए जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन नोटिसों का आधार मतदाता रिकॉर्ड में मिली विसंगतियां हैं।
इसके अलावा 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 47 लाख नाम शामिल नहीं थे। निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होना भी अंतिम रूप से नाम हटने का मतलब नहीं है और पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा दाखिल कर सकते हैं।
SIR प्रक्रिया में नोटिस पाने वाले मतदाताओं को संबंधित निर्वाचन अधिकारी के सामने जरूरी दस्तावेज और अपना जवाब देने का मौका मिलेगा। इसके बाद सत्यापन और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
दिल्ली की मतदाता सूची 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित की जानी है। इसलिए फिलहाल किसी व्यक्ति को SIR नोटिस मिलना केवल सत्यापन प्रक्रिया का हिस्सा है, इसे सीधे वोटर लिस्ट से नाम हटाने के तौर पर नहीं देखा जा सकता।