Russian Oil: विदेश मंत्री एस जयशंकर का बड़ा बयान, तेल खरीदने या न खरीदने से नहीं सुलझेगा विवाद

Russian Oil Sanctions: अमेरिकी सीनेट में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाने वाले बिल के पारित होने पर भारत के विदेश मंत्री ने अपनी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
Proposed Russian Oil Sanctions
विदेश मंत्री एस. जयशंकर (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Proposed Russian Oil Sanctions: अमेरिकी सीनेट में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने वाले बिल के पारित होने के बाद भारत ने अपनी प्रतिक्रिया स्पष्ट कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध का समाधान किसी देश द्वारा तेल खरीदने या न खरीदने से नहीं हो सकता। उन्होंने विवाद के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति को सबसे जरूरी रास्ता बताया।

अमेरिका की ओर से रूस पर दबाव बढ़ाने के लिए लाए गए इस प्रस्तावित कानून का असर भारत और चीन जैसे बड़े रूसी तेल आयातक देशों पर पड़ सकता है। ऐसे में यह मुद्दा भारत-अमेरिका संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है।

अमेरिकी सीनेट ने पारित किया सैंक्सन बिल

अमेरिकी सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ को भारी बहुमत से पारित किया है। बिल के पक्ष में 86 वोट पड़े, जबकि 11 सांसदों ने इसका विरोध किया।

प्रस्तावित कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस से ईंधन खरीदने वाले पांच सबसे बड़े आयातक देशों पर कड़े आर्थिक कदम उठाने का अधिकार मिल सकता है। इनमें भारत और चीन भी शामिल हैं। इन देशों पर 100 प्रतिशत तक आयात शुल्क लगाने का प्रावधान चर्चा में है।

जयशंकर ने कहा- तेल खरीद से युद्ध खत्म नहीं होगा

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि लंबे समय से जारी यूक्रेन युद्ध को किसी देश के तेल, कोयला, उर्वरक, एल्यूमिना या धातु खरीदने अथवा न खरीदने से समाप्त नहीं किया जा सकता।

उन्होंने कहा कि इस तरह के अंतरराष्ट्रीय विवादों का वास्तविक समाधान बातचीत, कूटनीति और दोनों पक्षों के बीच सीधी चर्चा से ही निकल सकता है। भारत लगातार शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन करता रहा है।

पीटर नवारो ने भारत-अमेरिका रिश्तों का दिया हवाला

अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत और अमेरिका के बीच संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच अच्छे कामकाजी संबंध हैं।

नवारो ने उम्मीद जताई कि दोनों नेता बातचीत के जरिए टैरिफ और प्रतिबंधों से जुड़े इस जटिल मुद्दे का समाधान निकाल सकते हैं। उन्होंने रूस से होने वाले तेल व्यापार को लेकर अपनी पुरानी आलोचना का भी जिक्र किया।

व्यापार समझौते पर भी नजर

बिल के पारित होने के बावजूद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। भारतीय वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने सीनेट के इस प्रस्ताव को अमेरिका की आंतरिक विधायी प्रक्रिया बताया और इस पर कमेंट करने से इनकार किया।

उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका एक बड़े व्यापार समझौते को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। दोनों देशों के अधिकारियों के बीच नियमित संपर्क भी जारी है।

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भारत की ऊर्जा सुरक्षा बनी अहम चुनौती

रूस से कच्चे तेल का आयात भारत की ऊर्जा जरूरतों और वैश्विक तेल बाजार से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। ऐसे में अगर प्रस्तावित अमेरिकी प्रतिबंध और 100 प्रतिशत तक टैरिफ का प्रावधान लागू होता है, तो इसका असर भारत के व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ सकता है।

फिलहाल भारत ने बातचीत और कूटनीति के जरिए विवाद सुलझाने पर जोर दिया है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अमेरिकी प्रतिबंधों की दिशा और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता किस तरह आगे बढ़ती है।

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