कनाथिल जमीला, (फाइल फोटो)  
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केरल में CPI-M विधायक कनाथिल जमीला का निधन, कैंसर का चल रहा था इलाज

Kanathil Jameela: माकपा नेता और कोयिलैंडी की मौजूदा विधायक कनाथिल जमीला का शनिवार को कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। जमीला 59 वर्ष की थीं और कैंसर का इलाज करा रही थीं। 

मनोज आर्या

CPI-M Kerala MLA Kanathil Jameela Dies: माकपा नेता और कोयिलैंडी की मौजूदा विधायक कनाथिल जमीला का शनिवार को कोझिकोड के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हुए जमीला को एक उत्साही और हंसमुख नेता बताया, जिन्होंने राज्य के महिला आंदोलन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। जमीला 59 वर्ष की थीं और कैंसर का इलाज करा रही थीं।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए केरल के मुख्यमंत्री विजयन ने लिखा कि कोयिलैंडी से निर्वाचित प्रतिनिधि कॉमरेड कनाथिल जमीला का निधन अत्यंत दुखद है। एक उत्साही और हंसमुख जननेता के रूप में उन्होंने एक मजबूत महिला आंदोलन के निर्माण की हमारी पार्टी की गौरवशाली विरासत को मूर्त रूप दिया।

महिला आंदोलन और समाज के लिए बड़ी क्षति

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विभिन्न स्थानीय निकायों में उनके समर्पित हस्तक्षेप ने विकेंद्रीकृत शासन के हमारे मॉडल को समृद्ध किया। उनका निधन हमारी पार्टी, महिला आंदोलन और समग्र समाज के लिए एक बड़ी क्षति है। मैं उनके परिवार, मित्रों और साथियों के साथ इस दुःख की घड़ी में शामिल हूं।

बीमारी के बावजूद भी लोगों से जड़ी रहीं जमीला

अपनी बीमारी के बावजूद जमीला लोगों के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ी रहीं, और जब भी उनका स्वास्थ्य ठीक होता, वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होतीं। 2021 के चुनावों में केरल विधानसभा में प्रवेश करने वाली जमीला ने एक गृहिणी से केरल की सबसे सम्मानित जमीनी नेताओं में से एक बनने तक के परिवर्तन की एक उल्लेखनीय कहानी प्रस्तुत की। कुट्टियाडी के ग्रामीण क्षेत्र में जन्मी, वह अपनी शादी के बाद थलक्कुलाथुर चली गईं।

कनाथिल जमीला का राजनीतिक सफर

राजनीति में उनका प्रवेश 1995 में अप्रत्याशित रूप से हुआ, जब उन्होंने थलक्कुलाथुर ग्राम पंचायत में चुनाव लड़ा और एक सीट जीती। उसी वर्ष वे पंचायत अध्यक्ष बनीं, जिससे उनके सार्वजनिक जीवन की शुरुआत हुई। उनका राजनीतिक विकास केरल के ऐतिहासिक जन योजना आंदोलन से गहराई से जुड़ा था, जिसने शासन का विकेंद्रीकरण किया और स्थानीय निकायों को सशक्त बनाया। इस आंदोलन ने न केवल महिलाओं को स्थानीय विकास की योजना और क्रियान्वयन में शामिल किया, बल्कि सशक्त महिला नेताओं को विकसित करने में भी मदद की।

जमीला ऐसी ही एक शख्सियत के रूप में उभरीं, जिन्होंने जमीनी स्तर पर जुड़ाव और सहभागी योजना के माध्यम से नेतृत्व का प्रदर्शन किया। सामुदायिक विकास में सक्रिय रूप से शामिल होकर, वे इस बात का प्रतीक बन गईं कि कैसे स्थानीय स्वशासन आम लोगों को प्रभावी जनप्रतिनिधियों में बदल सकता है।

पंचायत अध्यक्ष से लेकर ब्लॉक-स्तरीय नेतृत्व और अंततः राज्य विधानसभा तक का उनका सफर केरल में विकेंद्रीकृत लोकतंत्र और महिलाओं की भागीदारी की शक्ति को दर्शाता है।

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