फाइल फोटो (Image- Social Media) 
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JNU में विवादित नारे लगाने वालों का BJP से रिश्ता? कांग्रेस सांसद ने लगाए सनसनीखेज आरोप, मचा बवाल!

Pramod Tiwari on JNU Row: JNU में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर विवादित नारे लगाने के मामले में कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने प्रतिक्रिया दी है।

अर्पित शुक्ला

JNU Campus Protest: कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने दावा किया है कि दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में कथित विवादित नारे लगाने वालों का संबंध भारतीय जनता पार्टी से भी हो सकता है। तिवारी ने केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने जेएनयू की घटना को कांग्रेस से जोड़ा था।

प्रमोद तिवारी ने कहा, “मैं केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह से पूछना चाहता हूं कि क्या वह सोते-जागते सपने देखते रहते हैं। आखिर गिरिराज सिंह कांग्रेस के नेताओं से इतना भयभीत क्यों रहते हैं? सुबह-शाम-दोपहर वे कांग्रेस नेताओं का ही नाम जपते रहते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि अगर जेएनयू में किसी ने भी असंवैधानिक या आपत्तिजनक नारे लगाए हैं, तो वह उसकी निंदा करते हैं, क्योंकि किसी भी संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक नारे नहीं लगाए जाने चाहिए।

JNU पर गिरिराज सिंह ने क्या कहा था?

प्रमोद तिवारी ने कहा कि यह मामला अदालत में विचाराधीन है और उन्हें आशंका है कि कहीं इसके पीछे भाजपा ही तो नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे नारे लगवाकर भाजपा राजनीतिक फायदा उठाने का काम करती रही है। तिवारी ने कहा कि नारे लगाने वालों और भाजपा के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने जेएनयू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित नारेबाजी पर कहा था कि जेएनयू ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ और राहुल गांधी जैसी देश-विरोधी मानसिकता वाले लोगों का अड्डा बन गया है, चाहे वह RJD हो, TMC हो या वामदल।

JNU में क्यों मचा बवाल?

  • 6 साल बाद भी आजाद हैं ‘नकाबपोश’- ठीक 6 साल पहले, 5 जनवरी 2020 की वह रात कोई नहीं भूल सकता, जब नकाबपोश गुंडों ने छात्रों और शिक्षकों पर लाठी-डंडों से हमला किया था। कल जेएनयू शिक्षक संघ (JNUTA) और छात्र संघ ने इसे ‘क्रूर हमले’ की बरसी के रूप में याद किया। JNUSU के नेतृत्व में साबरमती हॉस्टल पर ‘गुरिल्ला ढाबा’ लगाकर अनोखा विरोध दर्ज कराया गया। छात्रों का सीधा सवाल सत्ता से था: 6 साल बीत गए, पुलिस और एजेंसियां उन नकाबपोश हमलावरों को अब तक क्यों नहीं पकड़ पाईं? आखिर उन्हें कौन बचा रहा है?
  • उमर खालिद और शरजील इमाम पर ‘हल्ला बोल’-  माहौल तब और अधिक तनावपूर्ण हो गया जब प्रदर्शन का रुख सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले की ओर मुड़ गया। कोर्ट ने हाल ही में दिल्ली दंगा मामले में पूर्व JNU छात्र उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज कर दी। इस फैसले से नाराज छात्रों ने उनकी तुरंत रिहाई की मांग करते हुए नारेबाजी की। JNUSU पदाधिकारियों का आरोप है कि यह छात्रों की आवाज को दबाने की साजिश है और वे इस फैसले के खिलाफ सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक संघर्ष जारी रखेंगे।

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