Sourav Das Slams CM Rekha Gupta: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं, इस मौके पर पूरे देश में अलग-अलग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। इसी कड़ी में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता पीएम के जन्मदिन के उपलक्ष्य में आयोजित 108 कुण्डीय यज्ञ में शामिल हुईं। अब इसे लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए तंज किया है।
सौरव दास ने एक्स पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री के इस तरह की धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने पर सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि क्या दिल्ली की जनता ने उन्हें यही सब ड्रामा करने के लिए चुना है? इसके अलावा सौरव दास ने गुजरात के वडनगर पहुंचे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का भी एक वीडियो शेयर किया, और उसके साथ लिखा कि यही वजह है कि सरकार ने पिछले 10 सालों में शिक्षा पर अपना खर्च आधा कर दिया है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता आज दिल्ली के खाटू श्याम धाम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर आयोजित 108 कुण्डीय यज्ञ में शामिल हुईं। इस दौरान उन्होंने पीएम मोदी की दीर्घायु की कामना करते हुए यज्ञ में आहुति दी। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसी पर तंज कसते हुए सौरव दास ने पोस्ट करते हुए पूछा कि क्या लोगों ने उनकों इन्हीं सब ड्रामा के लिए चुना है?
सौरव दास ने आगे कहा कि, क्या हमने CM को इसलिए चुना है कि वे सत्ता के नशे में चूर किसी व्यक्ति की तरह मोदी के जन्मदिन पर हवन करें? क्या किसी और देश में इस तरह के दृश्य देखने को मिलते हैं?
सौरव दास ने हाल ही में दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हुए पीजी हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कहा कि हादसे का दुख अभी भी लोगों के दिमाग में ताजा है। क्या रेखा जी ने उन छात्रों के परिवारों के लिए शांति हवन किया है? जब हमारे सपनों का विकसित भारत बनाने की बात आती है तो वे पूरी तरह से फेल हो जाते हैं।
सीजेपी नेता ने इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का एक वीडियो शेयर कर उन पर हमला बोला। अमित शाह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर उनके गृहनगर वडनगर पहुंचे थे। जहां उन्होंने एक कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के साथ मिलकर आरती की।
दास ने इसका वीडियो शेयर कर कहा कि इसीलिए सरकार ने पिछले 10 सालों में शिक्षा पर अपना खर्च आधा कर दिया है। ताकि नागरिक ऐसे 'मेगालोमैनियाक' (खुद को बहुत बड़ा समझने वाले), तर्कहीन और बिना सोचे-समझे वाले इंसान बन जाए। जिन्हें नियंत्रण करना आसान हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें चरमपंथी या असामाजिक तत्वों में भी बदला जा सके।