CJP Demands Resignation from Chief Election Commissioner: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। एसआईआर को लेकर विपक्ष के निशाने पर ज्ञानेश कुमार पहले से है। विपक्ष उनके इस्तीफे की मांग करते आ रहा है।
बीते दिनों सीएम रेखा गुप्ता, पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल समेत कई बड़े नामों को लेकर एसआईआर में आपत्ति और नोटिस का मामला देखने को मिला था। इसी बीच चुनाव आयोग में आपसी मतभेद की खबर सामने आने के बाद अब कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से इस्तीफा मांगते हुए 48 घंटे का अल्टीमेटम दे दिया है।
सीजेपी की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा, "अगर 48 घंटे के भीतर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो कॉकरोच जनता पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने तक हम पीछे नहीं हटेंगे।"
सीजेपी की तरफ से प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा, "अगर 48 घंटे के भीतर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं, तो कॉकरोच जनता पार्टी देशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफा देने तक हम पीछे नहीं हटेंगे।"
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए सीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि यह देश के युवाओं के खिलाफ रची जा रही एक बहुत बड़ी साजिश है, और हम, देश की जनता, इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। जैसा कि अभिजीत दीपके ने कहा, हमारा विपक्ष या किसी विशेष राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है, चाहे वह भाजपा हो, कांग्रेस हो, आम आदमी पार्टी हो या टीएमसी। ये इन पार्टियों के मुद्दे नहीं हैं; ये देश के युवाओं से जुड़े मुद्दे हैं। हम तीन मांगें रख रहे हैं।
पहली मांग: ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, उनके खिलाफ तत्काल आपराधिक कार्यवाही शुरू करना
दूसरी मांग: आगामी सभी चुनावों को तत्काल स्थगित किया जाए। एसआईआर को फ्रीज किया जाए और जनवरी 2025 की मतदाता सूची को बहाल किया जाए। एक स्वतंत्र जांच आयोग का गठन किया जाए जो जनता का विश्वास जगाए और एसआईआर से संबंधित सभी निर्णय प्रक्रियाओं की जांच करे। सर्वोच्च न्यायालय भी समान रूप से दोषी है। इसलिए, हम सर्वोच्च न्यायालय से यह भी मांग करते हैं कि एसआईआर से संबंधित सभी फाइलें और एसआईआर की निर्णय प्रक्रिया से संबंधित सभी फाइलें तत्काल जब्त कर ली जाएं।
तीसरी मांग: भारतीय निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी 2023 के कानून को निरस्त किया जाए और एक नया कानून बनाया जाए जो जनता का विश्वास जगाए, जिसमें नागरिक समाज के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी हो।