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चुनाव आयोग के मुद्दे को लेकर एनडीए का राहुल गांधी और कांग्रेस पर पलटवार।
राहुल गांधी और विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पीयूष गोयल ने पूछे सवाल।
जदयू नेता ललन सिंह ने कांग्रेस को जनता के बीच में जाने का दिया सुझाव।
Piyush Goyal On Rahul Gandhi: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों और भारतीय जनता पार्टी के बीच सियासी टकराव तेज होता जा रहा है। विपक्ष जहां चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है।
वहीं बीजेपी इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर सिधा प्रहार कर रही है। इसी क्रम में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और जेडीयू नेता राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला।
पीयूष गोयल ने राहुल गांधी से 10 सवाल पूछते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने शासनकाल में हुई नियुक्तियों और अपने राजनीतिक रुख की समीक्षा नहीं करती। वहीं, ललन सिंह ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाने और राजनीतिक लाभ के लिए माहौल बिगाड़ने का गंभीर आरोप लगाया।
पीयूष गोयल ने राहुल गांधी के चुनावी अनियमितताओं से जुड़े आरोपों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कांग्रेस के पास ठोस सबूत हैं, तो उन्हें चुनाव आयोग और कोर्ट के सामने पेश किया जाना चाहिए। उन्होंने पूछा कि बिहार और तमिलनाडू में SIR की प्रक्रिया के दौरान कांग्रेस का रुख क्या था और मतदाता सूची के शुद्धीकरण को लेकर पहले समर्थन जताने वाले नेताओं ने बाद में इसका विरोध क्यों किया?
गोयल ने कांग्रेस नेताओं के अलग-अलग राज्यों में दिए गए बयानों का हवाला देते हुए पार्टी पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव में जीत मिलने पर प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाए जाते, लेकिन हार के बाद चुनाव आयोग को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी सवाल किया कि यदि कांग्रेस चुनावी व्यवस्था को लेकर गंभीर आशंकाएं जता रही है, तो उन राज्यों में उसकी सरकारों का रुख क्या है, जहां पार्टी या उसके सहयोगी सत्ता में हैं। इसके साथ ही उन्होंने राहुल गांधी से आरोपों के समर्थन में हलफनामा और साक्ष्य पेश करने की मांग की।
पीयूष गोयल ने चुनाव आयोग से जुड़े पूर्व अधिकारियों की नियुक्तियों और बाद में उन्हें मिले राजनीतिक पदों का हवाला देकर कांग्रेस को घेरने की कोशिश की। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टी.एन. शेषन, एम.एस. गिल और नवीन चावला के नामों का उल्लेख करते हुए कांग्रेस के पुराने फैसलों पर सवाल उठाए।
गोयल का तर्क था कि कांग्रेस को चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल में संवैधानिक पदों पर नियुक्तियों और पूर्व अधिकारियों को दिए गए राजनीतिक अवसरों पर भी जवाब देना चाहिए।
जेडीयू नेता ललन सिंह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में संविधान सर्वोपरि है, कोई राजनीतिक परिवार नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने राजनीतिक हितों के लिए संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा कर रही है।
ललन सिंह ने इंदिरा गांधी के शासनकाल का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर इतिहास से सबक नहीं लेने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति जिम्मेदार रवैया अपनाना चाहिए। बिहार में कांग्रेस की घटती सीटों का उल्लेख करते हुए उन्होंने पार्टी की राजनीतिक रणनीति और नीतियों पर भी सवाल उठाए।
जदयू नेता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का बचाव करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपनी राजनीतिक चुनौतियों के लिए संस्थाओं को जिम्मेदार ठहराने के बजाय जनता के बीच अपना विश्वास मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिए।