Prof Tariq Mansoor BJP National Vice President: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने अपनी नई टीम का ऐलान कर दिया है। नितिन नबीन की नई टीम में राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत कई बड़े नेताओं की वापसी हुई है। राजे को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है। साथ ही राम माधव की भी भाजपा संगठन में वापसी हुई है, उनको भी पार्टी उपाध्यक्ष बनाया गया है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को भी भाजपा संगठन में लाया गया है। उनको राष्ट्रीय महामंत्री का पद दिया गया है। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत को भी भाजपा उपाध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा संगठन की नई टीम में सबसे टीम में सबसे चर्चित नाम प्रो. तारिक मंसूर हैं।
प्रो. तारिक मंसूर को जुलाई, 2023 में पहली बार पार्टी तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में शामिल किया गया था। नितिन नबीन की नई टीम में मुस्लिम चेहरे के रूप में तारिक मंसूर को फिर से शामिल किया गया है।
बता दें, प्रोफेसर तारिक मंसूर 6 साल तक (मई 2017 से अप्रैल 2023) तक उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर रहे। इसके बाद वे भाजपा से एमएलसी बनाए गए। प्रो. तारिक मंसूर के पहले से ही आरएसएस और बीजेपी के नेताओं से करीबी संबंध रहे हैं। उन्होंने अपने कुलपति कार्यकाल में अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के शताब्दी वर्ष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया था। इस पर काफी बवाल भी हुआ था। प्रो. तारिक मंसूर के बेटे की शादी में संघ प्रमुख मोहन भागवत शामिल हुए थे, जोकि काफी चर्चाओं में रहा।
बता दें, 2019 के दौरान जब पूरे देश में CAA-NRC को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा था। उस दौरान एएमयू में भी छात्रों ने सीएए-एनआरसी के विरोध में आंदोलन किया। तब विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के रूप में डॉ. मंसूर ने कैंपस में ही पुलिस फोर्स बुला ली थी। एएमयू में ऐसा पहली बार हुआ था जब कैंपस के अंदर पुलिस फोर्स आई।
प्रो. तारिक मंसूर मुसलमानों में कुरैशी बिरादरी से तालुक रखते हैं। मुस्लिमों में कुरैशी बिरादरी को पसमांदा कहा जाता है। भाजपा इसी पसमांदा समुदाय को अपनी तरफ करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए पार्टी तरफ से समय-समय पर कई कार्यक्रम भी आयोजित किया जाता रहा है।
बता दें, मुस्लिमों में पसमांदा समाज आर्थिक, सामाजिक, शैक्षणिक और राजनीतिक रूप से काफी पिछड़े रहे हैं। पूरे देश में कुल मुस्लिमों की आबादी में लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा पसमांदा बिरादरी का है। वहीं, महज 15 प्रतिशत हिस्सा ही उच्च जाति के मुस्लिमों की है। पसमांदा वर्ग में दलित और पिछड़े वर्ग के मुस्लिम आते हैं।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी की वेबसाइट के अनुसार, डॉ. तारिक मंसूर AMU में कुलपति से पहले अलीगढ़ स्थित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग में प्रोफेसर थे। प्रधानमंत्रील नरेंद्र मोदी पर आधारित बीबीसी डॉक्यूमेंट्री की आलोचना करते हुए उन्होंने इसे 'एजेंडा-संचालित पत्रकारिता' करार दिया था।
करीब चार दशकों के अनुसंधान, शिक्षण, प्रशासनिक और क्लिनिकल कार्यकाल में उनके 107 पब्लिकेशन हैं। इस दौरान उन्होंने 58 पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल छात्रों की थीसिस का भी पर्यवेक्षण किया।
प्रधानमंत्री द्वारा डॉ. तारिक मंसूर को वर्ष, 2023 के लिए पद्म पुरस्कार समिति के सदस्य के रूप में भी नामित किया गया था। इसके अलावा वो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के मेंबर भी रह चुके हैं। वे भारतीय प्रबंधन संस्थान (लखनऊ) के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स में भी रह चुके हैं। साथ ही अल्पसंख्यक शिक्षा की राष्ट्रीय निगरानी समिति, मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन (अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय, भारत सरकार) के शासी निकाय और शिक्षा मंत्रालय में भी पदासीन रहे हैं।