अन्ना हजारे  
देश

फौलादी विचारों वाले 'दूसरे गांधी' अन्ना हजारे से जुड़ी ये ख़ास बातें नहीं जानते होंगे आप

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ आंदोलन में आम आदमी को जोड़ने वाले 73 साल के सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे का मूल नाम किसन बापट बाबूराव हज़ारे है।अन्ना हज़ारे भारत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते हैं, जो हमेशा सफेद खादी के कपड़े पहनते हैं और सिर पर गांधी टोपी पहनते हैं।

राहुल गोस्वामी

नई दिल्ली: भारतीय सामाजिक कार्यकर्त्ता होने के साथ ही अन्ना हजारे युं तो कई मुद्दों पर आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता के रूप में जाने जाते है। अन्ना हजारे महात्मा गांधी की विचारधारा पर चलने वाले समाजसेवक हैं। लेकिन अन्ना ने लोकपाल बिल को पास करवाने से लेकर भ्रष्टाचार के खिलाफ तब आवाज बुलंद की थी, जब केजरीवाल जैसे दर्जनों उनके अनुयायी हुआ करते थे। उनके इसी जज्बे के चलते देशभर में उनके करोड़ों चाहने वाले हैं।

आज उनके आने वाले जन्मदिन के मौके पर हम आपको अन्ना से जुड़ी कुछ खास बातों से अवगत कराएंगे।

  • अन्ना हजारे का जन्म 15 जून सन् 1937 में महाराष्ट्र के भिनगर जगह में हुआ था। उनका असली नाम किसान बाबूराव हजारे है। लेकिन लोग उन्हे अन्ना हजारे के नाम से जानते हैं। मराठी समुदाय में घर के बड़े को अन्ना कहते हैं। इसी के चलते उन्हें अन्ना नाम से बुलाया जाने लगा।
  • अन्ना हजारे घर में सबसे बड़े हैं। उनके 6 भाई-बहन हैं।
  • अन्ना शुरू से ही अपने उसूलों के बड़े पक्के थे। उन्हें बचपन से ही मुफ्त की रोटी तोड़ने का बिल्कुल भी शौक नहीं था। इसीलिए घर की आर्थिक स्थिति सही न होने पर उन्होंने गुजारे के लिए फूल तक बेचेने पड़े थे।
  • सन् 1963 में अन्ना ने इंडियन आर्मी से जुड़े थे। तब भारत और चीन का युद्ध हुआ था। जिसमें भारतीय सेना बुरी तरह से हार गई थी । तब सरकार ने लोगों से भारतीय सेना में शामिल होने की अपील की थी।
  • अन्ना ने भारतीय सेना में करीब 15 साल तक रहो इसके बाद उन्होंने वॉलियंटरी रिटायरमेंट ले ली थी।
  • अन्ना हजारे को अपने सैन्य पोस्टींग के दौरान एक बड़ी मुसीबत का सामना करना पड़ा था। 1965 में पाकिस्तान की ओर से इंडियन पोस्ट पर हुए हवाई फायरिंग में अन्ना बाल-बाल बचे थे। तब से ही अन्ना ने अपने को एक सामाजिक कार्यकर्ता के तौर खुद को देश की सेवा के लिए समर्पित कर दिया था।
  • अन्ना हजारे अपने जीवन में स्वामी विवेकानंद से काफी प्रवाहित रहे । दरअसल नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर उन्होंने विवेकानंद की एक किताब पढ़कर ही अपनी जिंदगी का मकसद तय किया था।
  • अन्ना हजारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानते हैं । वे हमेशा उनके सिद्धांतों पर चले। अन्ना ने बदलाव की शुरुआत सबसे पहले अपने ही गांव से की थी। उन्होंने अपने गांव को मॉडल विलेज बनाने में मदद की थी। जिसके चलते उन्हें काफी सराहना मिली थी।
  • अन्ना हजारे ने भ्रष्टाचार के खिलाफ भी अपनी आवाज बुलंद की । उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनशन किया । इस दौरान वे कई दिनों तक भूखे-प्यासे रहे थे। उनके इस काम को देखते हुए पूरा देश ही उनके समर्थन में उतर आया था। उन्होंने लोकपाल बिल पास करवाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • अन्ना हजारे ने देश की सेवा के चलते कभी गृहस्थ जीवन में नही रमें। वे आज भी रालेगढ़ सिद्धि में स्थित संत यादव बाबा मंदिर के पास एक छोटे से कमरे में अकेले ही रहते हैं।

देखा जाए तो अन्ना हज़ारे देश की सेना में अपना कर्तव्य निभाने के बाद 80 के दशक में महाराष्ट्र में एक ऐसा चेहरा बनकर उभरे जो सरकारी भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ एक मशाल जलाने का बेहद जोखिम लिया। दरअसल एक केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ बोलने की जुर्रत करना किसी ने नही किया था। कांग्रेस से लेकर शिवसेना-बीजेपी की सरकारों से वे टकराते रहे लेकिन वे फिर भी न झुके, न बिके।

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