Manan Kumar Mishra Apologizes Nalsar Students: हैदराबाद के नेशनल लॉ कॉलेज (नालसर) में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत के दीक्षांत समारोह में शामिल होने वाले विवाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा माफी मांगी है। इसके पहले CJI के आने का विरोध करने वाले लॉ स्टूडेंट्स के एनरोल होने पर मनन मिश्रा ने रोक लगा दी थी। इस आदेश के बाद उनका भी विरोध शुरू हो गया था।
विवाद बढ़ता देख उन्होंने अपना फैसला वापस ले लिया था। इस पर सीजेआई ने भी फटकार लगाई थी। इस पूरे घटनाक्रम के दो दिन बाद उन्होंने 15 अगस्त के दिन पत्र जारी करके छात्रों से माफी मांगी है।
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन और राज्यसभा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने एक बयान जारी किया है। उन्होंने लिखा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं से छात्रों के एक वर्ग में चिंता और नाराजगी पैदा हुई है। जब भी छात्र आहत या परेशान महसूस करते हैं, तो उनकी चिंताओं को धैर्य, संवेदनशीलता और सम्मान के साथ सुना जाना चाहिए।
आगे उन्होंने लिखा कि अगर मौजूदा विवाद से जुड़ी किसी बात, मेरे किसी शब्द या पत्र से हमारे लॉ के छात्रों की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं इसके लिए ईमानदारी से खेद और माफी व्यक्त करता हूं।
पत्र में मनन मिश्रा ने लिखा कि हमारे लॉ स्टूडेंट्स, खासकर वे जो नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज और कानूनी शिक्षा के अन्य प्रमुख केंद्रों में पढ़ रहे हैं, देश के सबसे जागरूक और समझदार युवा नागरिकों में से हैं। वे संविधान, कानून के शासन, निष्पक्षता और किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले सभी पक्षों को सुनने के महत्व का अध्ययन करते हैं।
आगे लिखा कि वे अपनी स्वतंत्र सोच का इस्तेमाल करने में पूरी तरह सक्षम हैं। उन्हें अपने लिए निर्णय लेने के लिए किसी की जरूरत नहीं है। न ही उन पर किसी भी तरफ से दबाव या प्रभाव डाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह किसी ग्रेजुएट हो रहे छात्र और उसके परिवार के जीवन का एक बहुत ही खास मौका होता है। यह बरसों की कड़ी मेहनत को दिखाता है और जीवन में एक अहम बदलाव का प्रतीक है। ऐसे पल को आसानी से दोबारा नहीं बनाया जा सकता। इसमें शामिल होने या न होने का फैसला जाहिर है कि आखिरकार छात्रों को ही करना चाहिए।
आगे उन्होंने कहा कि किसी भी छात्र को शामिल होने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए, और न ही किसी छात्र को दूर रहने के लिए मजबूर महसूस करना चाहिए। मेरी बस यही अपील है कि फैसला आजादी से, पूरे मामले पर विचार करने के बाद और अपनी समझ के अनुसार लिया जाना चाहिए।