बाबा रामदेव (Image- Social Media) 
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RSS का विरोध वही करता है जो...बाबा रामदेव ने आर्य समाज से की तुलना, बयान पर सियासी घमासान तय!

RSS News: योग गुरु बाबा रामदेव ने आरएसएस पर प्रतिबंध की मांग को राष्ट्र-विरोधी और सनातन-विरोधी ताकतों का गुप्त एजेंडा बताया है। खरगे द्वारा प्रतिबंध लगाने की बात कहने पर यह विवाद बढ़ा है।

अर्पित शुक्ला

Baba Ramdev News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर आरएसएस और कांग्रेस पार्टी के बीच जारी वाकयुद्ध के बीच, योग गुरू बाबा रामदेव ने बिना नाम लिए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने रविवार को कहा कि राष्ट्र-विरोधी और सनातन विरोधी ताकतें अपने गुप्त एजेंडे और स्वार्थी उद्देश्यों को पूरा करने के लिए इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग कर रही हैं। समाचार एजेंसी ANI को दिए एक साक्षात्कार में बाबा रामदेव ने आरएसएस और आर्य समाज के बीच तुलना करते हुए डॉ. हेडगेवार, सदाशिवराव गोलवलकर और अन्य महापुरुषों के राष्ट्र के प्रति योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान में लाखों संघ कार्यकर्ता देश की सेवा में जुटे हुए हैं।

बाबा रामदेव ने कहा, "आर्य समाज की तरह, आरएसएस भी एक राष्ट्रवादी संगठन है और इसके भीतर डॉ. हेडगेवार से लेकर सदाशिवराव गोलवलकर तक कई महान व्यक्तियों ने तपस्या की है। आज भी संघ के लाखों कार्यकर्ता देश की सेवा कर रहे हैं। जब राष्ट्र-विरोधी, सनातन-विरोधी ताकतें आरएसएस या किसी भी हिंदुत्ववादी ताकत का विरोध करती हैं, तो इसके पीछे उनका कोई छिपा हुआ एजेंडा और स्वार्थ होता है।"

खरगे ने क्या कहा था?

खरगे के बयान के बाद बाबा रामदेव का यह बयान सामने आया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा सरदार वल्लभभाई पटेल के 1948 में आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने के फैसले का हवाला देते हुए यह तर्क दिया था कि यह संगठन कानून और व्यवस्था की समस्याओं के लिए जिम्मेदार है। इसके बाद खरगे के बेटे, कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने भी आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। 28 अक्टूबर को कर्नाटक उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी, जिसमें बिना अनुमति के सरकारी परिसरों में 10 से अधिक लोगों के साथ आरएसएस के आयोजनों को अवैध घोषित किया गया था। प्रियांक खरगे ने यह भी बताया कि राज्य आरएसएस के खिलाफ नए कानूनों पर विचार कर रहा है और सरकारी कर्मचारियों को किसी भी राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने से रोकने वाले मौजूदा कानूनों को मजबूत करने की योजना बना रहा है।

'खरगे को अतीत से सीखना चाहिए'

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबोले ने भी खरगे के बयान का विरोध करते हुए कहा कि किसी भी प्रतिबंध के लिए एक वैध कारण होना चाहिए और जो लोग इसकी मांग कर रहे हैं, उन्हें पिछले असफल प्रयासों से कुछ सीखना चाहिए। होसबोले ने कहा कि प्रतिबंध लगाने के पीछे कोई ठोस कारण होना चाहिए। राष्ट्र निर्माण में लगे इस संगठन पर प्रतिबंध लगाने से क्या हासिल होगा? जनता पहले ही आरएसएस को स्वीकार कर चुकी है। 100 साल पुराना आरएसएस देशभर में सामाजिक सेवाओं के क्षेत्र में सक्रिय है। हालांकि यह संगठन राजनीति से दूर रहता है, लेकिन आरएसएस के कुछ नेताओं ने 1980 में भाजपा का गठन किया था।

आजादी के बाद इस संगठन पर तीन बार प्रतिबंध लगाया गया है। पहली बार 1948 में नाथूराम गोडसे द्वारा महात्मा गांधी की हत्या के बाद इसे प्रतिबंधित किया गया था, लेकिन तत्कालीन गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने एक सरकारी अधिसूचना जारी कर इसे हटा लिया था। गांधीजी की हत्या की जांच में आरएसएस की संलिप्तता नहीं पाई गई थी। दूसरी बार 1975 में आपातकाल के दौरान, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इस पर प्रतिबंध लगाया था। तीसरी बार, 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद इसे प्रतिबंधित किया गया था।

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