नई दिल्ली: इस बार के मानसून सत्र में सदन में कई सारे मुद्दों पर केंद्र सरकार और विपक्ष में घमासान देखने को मिला। जहां एक बार फिर अमित शाह और टीएमसी के नेताओं के बीच सदन में गहमागहमी देखने को मिली। जहां एक सवाल के जवाब में केंद्रीय गृहमंत्री ने पश्चिम बंगाल के मॉडल पर तंज कसते हुए कहा कि मेरा मानना है कि कोई भी राज्य नहीं चाहेगा कि पश्चिम बंगाल मॉडल उनके यहां अपनाया जाए।
लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान वामपंथी उग्रवाद को लेकर सदस्य जब सवाल पूछ रहे थे। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय सवालों का जवाब दे रहे थे। इसी बीच पश्चिम बंगाल के दमदम से तृणमूल कांग्रेस के सांसद प्रोफेसर सौगत रॉय ने सवाल पूछते हुए पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया। जिसके जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के मॉडल पर आपत्ति जताई।
सदन में जब दमदम से तृणमूल कांग्रेस के सांसद प्रोफेसर सौगत रॉय ने सवाल पूछते हुए पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया तब गृह मंत्री अमित शाह नेखड़े होकर मुस्कुराते हुए जवाब दिया मेरा मानना है कि कोई भी राज्य नहीं चाहेगा कि पश्चिम बंगाल मॉडल उनके यहां अपनाया जाए। जानकारी के लिए बता दें कि टीएमसी सांसद प्रोफेसर सौगत रॉय ने कहा कि वामपंथी उग्रवाद की समस्या पिछले 10-15 सालों में चार-पांच राज्यों में रही है। सबसे ज्यादा छत्तीसगढ़, उसके बाद महाराष्ट्र का गढ़चिरौली, ओडिशा का कोल्हापुर और फिर आंध्र प्रदेश है। उन्होंने कहा कि अभी भी हम देखते हैं कि हर हफ्ते माओवादियों से मुठभेड़ होती है। यह रुकी नहीं है।
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आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए सौगत रॉय ने जब कहा कि वहां भी वामपंथी उग्रवाद पनपा। वहां ममता बनर्जी की सरकार ने जो विकास कार्य किए और आदिवासी लड़कों को नौकरी देने का काम किया, उसमें सिर्फ एक किशनजी की हत्या करनी पड़ी और वामपंथी उग्रवाद रुक गया।
जिसके बाद लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सौगात रॉय से पूछा कि आपका सवाल क्या है? जहां टीएमसी सांसद ने कहा, मैं गृह मंत्री से पूछना चाहता हूं कि क्या वह पश्चिम बंगाल मॉडल का अध्ययन करेंगे और छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों में भी यही मॉडल लागू करेंगे। क्योंकि ये लोग काबू में नहीं आ पा रहे हैं।
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इसके जवाब में गृह मंत्री अमित शाह ने खड़े होकर कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार को पूरे देश में किसी भी राज्य के अच्छे प्रदर्शन का उदाहरण लागू करने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन मेरा मानना है कि कोई भी राज्य नहीं चाहेगा कि पश्चिम बंगाल मॉडल उनके यहां अपनाया जाए।