अमित शाह (डिजाइन फोटो) 
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बिहार की तरह बंगाल में 'खेला' करेंगे शाह! तैयार हो गया 'चाणक्य' का मास्टर प्लान, खुद संभालेंगे कमान

West Bengal Assembly Elections: साल के 12 महीने और 365 दिन चुनावी मोड में रहने वाली दुनिया की सबसे बड़ी सियासी पार्टी ने बिहार विजय के बाद बंगाल फतह के लिए रणनीति बना ली है।

अभिषेक सिंह

Amit Shah Strategy: साल के 12 महीने और 365 दिन चुनावी मोड में रहने वाली दुनिया की सबसे बड़ी सियासी पार्टी ने बिहार विजय के बाद बंगाल फतह के लिए रणनीति बना ली है। पश्चिम बंगाल के साथ-साथ असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी के लिए भी भाजपा के 'चाणक्य' का मास्टर प्लान तैयार हो चुका है।

बिहार के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए खुद स्ट्रेटेजिक लीडरशिप की कमान संभालेंगे। शाह इस महीने के आखिर में पश्चिम बंगाल के दौरे से अपना कैंपेन शुरू करेंगे। इसके बाद, चुनाव का नोटिफिकेशन जारी होने तक वे हर महीने कम से कम तीन दिन असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे दूसरे राज्यों में बिताएंगे।

तैयार हो गया शाह का मास्टर प्लान

बिहार की तरह इन सभी राज्यों में शाह की स्ट्रेटेजी कार्यकर्ताओं में जोश भरना, संगठन को एक्टिव करना और सहयोगी दलों के साथ मिलकर कैंपेन चलाना और एक ठोस रणनीति लागू करना है। इन राज्यों में BJP पश्चिम बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी, जबकि तमिलनाडु, केरल और असम में वह सहयोगी दलों के साथ चुनाव लड़ेगी।

बंगाल में चलेगा बिहार वाला फार्मूला

ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल में BJP की जीत पक्की करने के लिए, अमित शाह बिहार वाला फॉर्मूला अपनाएंगे। उनकी स्ट्रेटेजी में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ रीजनल मीटिंग करना, बूथ कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत करना और इलाके के हिसाब से लोकल लेवल की स्ट्रेटेजी बनाना शामिल होगा।

बिहार की तरह अमित शाह बंगाल दौरे के दौरान संगठन को बेहतर बनाने के लिए एक ऑर्गनाइज़ेशनल मीटिंग में मौजूदा पॉलिटिकल हालात का रिव्यू करेंगे। इस दौरान स्ट्रेटेजिक मीटिंग भी होंगी, जहां चुनाव कैंपेन के दौरान उठाए जाने वाले मुद्दों पर फैसला किया जाएगा।

अन्य राज्यों के लिए भी रणनीति तैयार

बिहार की तरह BJP असम, केरल और तमिलनाडु में अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर एक जॉइंट स्ट्रेटेजी और कैंपेन लागू करेगी। इस सिलसिले में बिहार में BJP ने अपने कार्यकर्ताओं को NDA की जीत पक्की करने का लक्ष्य दिया है। सहयोगी पार्टियों के कार्यकर्ताओं को बूथ कमेटियों और मैनेजमेंट में भी शामिल किया गया है। जॉइंट कैंपेनिंग की एक सफल स्ट्रेटेजी भी बनाई गई है।

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