ओम प्रकाश चौटाला, (पूर्व सीएम, हरियाणा) 
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Haryana: ओपी चौटाला के आखिरी दर्शन करने पहुंचे अजय चौटाला, दोपहर 3 बजे होगा अंतिम संस्कार

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे ओमप्रकाश चौटाला ने साल 1968 में राजनीतिक में एंट्री लिया था। ओपी चौटाला हरियाणा में धोती-कुर्ता पहनने वाले आखिरी CM थे। गहरे हरे रंग की तुर्रा वाली पगड़ी चौटाला की पहचान थी।

मनोज आर्या

नई दिल्ली: हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और इंडियन नेशनल लोक दल के अध्यक्ष ओमप्रकाश चौटाला का शुक्रवार को निधन हो गया। अंतिम दर्शन के लिए आज उनका पार्थिव शरीर सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक सिरसा स्थित तेजा खेड़ा फार्म पर रखा गया है। दोपहर 3 बजे उनको मुखाग्नि दी जाएगी। ओपी चौधरी के अंतिम दर्शन के लिए अजय चौटाला परिवार के साथ पहुंच चुके हैं। वहीं रणजीत चौटाला ने खेड़ा पहुंचकर उनका अंतिम दर्शन किया। सूत्रों के हवाले से ऐसी खबर आ रही है कि पूर्व सीएम के अंतिम संस्कार में प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी शामिल होंगे।

इससे पहले शुक्रवार की देर रात ओम प्रकाश चौटाला के भतीजे और INLD नेता आदित्य चौटाला ने कहा कि उनका पार्थिव शरीर फार्म हाउस पर लाया गया है। कल यानी शनिवार सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक उनका पार्थिव शरीर लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। जिसके बाद आज शनिवार को पूर्व सीएम चौधरी ओम प्रकाश चौटाला को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए नेता तेजा खेड़ा फार्महाउस पहुंचे।

साल 1968 में हुई थी राजनीतिक एंट्री

हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री रहे ओमप्रकाश चौटाला ने साल 1968 में राजनीतिक में एंट्री लिया था। ओपी चौटाला हरियाणा में धोती-कुर्ता पहनने वाले आखिरी CM थे। गहरे हरे रंग की तुर्रा वाली पगड़ी चौटाला की पहचान थी। हर कार्यक्रम में वह यही पगड़ी पहनकर जाते थे। उनके बाद जो भी सीएम बने, चाहे भूपेंद्र हुड्‌डा, मनोहर लाल खट्टर हो या फिर नायब सैनी, लेकिन उन्होंने कभी सार्वजनिक कार्यक्रम में धोती और पगड़ी नहीं पहनी।

5 दिन से लेकर 5 सात तक का कार्यकाल

ओपी चौटाला ऐसे मुख्यमंत्री रहे जिनका कार्यकाल 5 दिन से लेकर 5 साल तक का रहा। ओपी चौटाला से जुड़ी कई कहानियां आज भी मशहूर हैं। इसमें से एक किस्सा ये है कि जब वह पहली बार चुनाव लड़े तो उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में मिली हार से बौखलाए ओपी चौधरी जिद्द पर अड़े रहे और अंतत: चुनाव रद्द करवाकर फिर से उपचुनाव करवाया और फिर इस चुनाव में जीत हासिल की।  ये वाक्या है साल 1968 में हुे विधानसभा चुनाव की। इस चुनाव में ओपी चौटाला ने प्रदेश के ऐलनाबाद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा।

पारंपरिक सीट होने की वजह से यहां के चुनाव में पूरे चौधरी परिवार ने ताकत झोंक दी, लेकिन चौटाला विशाल हरियाणा पार्टी के लालचंद्र खोड़ा से चुनाव हार गए। चुनाव हारने के बाद ओम प्रकाश चौटाला ने धांधली का आरोप लगाए। फिर वे हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़े। आखिर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 1970 में ऐलनाबाद सीट पर उपचुनाव की घोषणा हुई। चौटाला यहां से उपचुनाव में उतरे और जीतकर पहली बार विधायक बने।

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