फ्लाइट में बैठे यात्री और पायलट।  
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जान से खिलवाड़ कर रहीं एयरलाइन कंपनियां, सरकार का यह डाटा देखने के बाद फ्लाइट से सफर करने में डरेंगे!

Govt Data News : डीजीसीए ने विमानन कंपनियों के विमानों की जांच की तो आधे विमानों में बार-बार होने वाली खराबी मिली। केंद्र सरकार ने लोकसभा में यह जानकारी दी है। इस पर एयर इंडिया का जवाब आया है।

रंजन कुमार

India Flights Recurring Defects : हवाई सफर करने वालों के लिए संसद से आई एक रिपोर्ट किसी झटके से कम नहीं है। लोकसभा में 5 फरवरी को पेश किए गए आंकड़ों ने भारतीय एयरलाइंस की फिटनेस पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक देश की प्रमुख विमानन कंपनियों के लगभग आधे विमान तकनीकी रूप से पूरी तरह फिट नहीं हैं और उनमें बार-बार होने वाली खराबी (रिपीटेड डिफेक्ट्स) पाई गई है।

नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल द्वारा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, जनवरी 2025 से अब तक 6 एयरलाइंस के कुल 754 विमानों की तकनीकी जांच की गई। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 377 विमानों में बार-बार खराबी आने की समस्या मिली।

इंडिगो की 405 विमानों में से 148 विमानों में खराबी

संख्या की बात करें तो इंडिगो सबसे आगे है। जांचे गए उसके 405 विमानों में से 148 (करीब 36%) में दिक्कतें मिलीं। प्रतिशत के लिहाज से देखें तो एयर इंडिया का रिकॉर्ड सबसे डरावना है। एयर इंडिया ग्रुप के 267 विमानों में से 191 में बार-बार खराबी पाई गई, जो कुल फ्लीट का लगभग 72 प्रतिशत है। स्पाइसजेट के 43 में से 16 और अकासा एयर के 32 में से 14 विमानों में ऐसी गड़बड़ियां मिलीं।

खतरा नहीं, बस छोटी कमियां

रिपोर्ट पर मचे बवाल के बीच एयर इंडिया ने सफाई दी है। कंपनी के प्रवक्ता का कहना है कि उन्होंने सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए बहुत बारीकी से चेकिंग की है, इसलिए यह संख्या अधिक दिख रही है। एयर इंडिया के अनुसार ये खराबी कैटेगरी-D की हैं, जिसमें सीटें, ट्रे टेबल या इंफोटेनमेंट स्क्रीन जैसी चीजें शामिल हैं। इनका विमान की सुरक्षा या उड़ान भरने की क्षमता से कोई सीधा संबंध नहीं है।

डीजीसीए ने बढ़ाई निगरानी

विमानों की बिगड़ती हालत को देखते हुए एविएशन रेगुलेटर डीजीसीए ने अपनी निगरानी कई गुना बढ़ा दी है। मंत्री मोहोल ने बताया कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 550 नाइट इंस्पेक्शन (रात में औचक निरीक्षण) और 874 स्पॉट चेक किए गए हैं। यही नहीं तकनीकी कर्मचारियों की संख्या भी 637 से बढ़ाकर 1063 कर दी गई है। यह डेटा उन यात्रियों के लिए एक चेतावनी की तरह है, जो हवाई सफर को सबसे सुरक्षित मानते हैं। अब देखना यह है कि ये एयरलाइंस अपनी कैटेगरी-D की कमियों को कब तक दुरुस्त कर पाती हैं।

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