अपराजिता सारंगी, फोटो- सोशल मीडिया 
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पीएम हो या सीएम… जेल गए तो जाएगी कुर्सी! JPC गठित, समिति की अध्यक्ष बनीं अपराजिता सारंगी

BJP नेता अपराजिता सारंगी को उस संयुक्त समिति का अध्यक्ष बनाया गया है, जो गंभीर आरोपों में 30 दिनों तक गिरफ्तार रहने पर पीएम, सीएम और मंत्रियों को पद से हटाने वाले बिलों की जांच करेगी।

प्रतीक पाण्डेय

Aparajita Sarangi: बुधवार यानी 13 नवंबर 2025 को भाजपा नेता अपराजिता सारंगी को संसद की संयुक्त समिति की अध्यक्षता के लिए नियुक्त किया गया। यह समिति उन प्रस्तावित विधेयकों की जांच करेगी जिनके तहत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या केंद्रीय/राज्य मंत्रियों को गंभीर आरोपों में 30 दिनों तक गिरफ्तार या हिरासत में रहने पर हटाया जा सकेगा।

इस समिति का मुख्य उद्देश्य उन बिलों की जांच करना है जो गंभीर आरोपों में गिरफ्तारी/हिरासत के आधार पर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों को पद से हटाने से संबंधित हैं। सरकार का कहना है कि यह विधेयक आवश्यक है क्योंकि अरविंद केजरीवाल ने आपराधिक मामले में गिरफ्तारी के बावजूद दिल्ली के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, विपक्ष का तर्क है कि ये बिल कानून के मौलिक सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं।

विपक्षी दलों ने किया बहिष्कार, फिर भी बनी समिति

यह 31 सदस्यीय पैनल मुख्य विपक्षी दलों द्वारा समिति का बहिष्कार किए जाने की घोषणा के साथ गठित हुआ है। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस जैसे कई विपक्षी दलों ने समिति का हिस्सा नहीं बनने का निर्णय लिया है। विपक्षी गठबंधन आइएनडीआइए का हिस्सा न होते हुए भी बीजद और बीआरएस ने भी इस पैनल से दूरी बनाई है।

पैनल की संरचना: 15 भाजपा, 11 एनडीए सदस्य

लोकसभा सचिवालय के बयान के अनुसार, 31 सदस्यीय इस संयुक्त समिति में 15 सदस्य भाजपा से, 11 सदस्य राजग (NDA) के घटक दलों से और एक नामित सदस्य है। लगभग हर राजग घटक दल को समिति में प्रतिनिधित्व मिला है। इस समिति में कई बड़े नाम शामिल हैं।

संयुक्त समिति में कौन-कौन?

विपक्षी दलों से सिर्फ चार सदस्यों को नामित किया गया है। इनमें राकांपा (एसपी) की नेता सुप्रिया सुले, अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल, एआइएमआइएम के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और वाईएसआरसीपी के सदस्य निरंजन रेड्डी शामिल हैं। खास बात यह है कि राकांपा (एसपी) ने अन्य विपक्षी दलों से अलग होकर इस समिति का हिस्सा बनने का निर्णय लिया। राज्यसभा की नामित सदस्य सुधामूर्ति भी इस पैनल में हैं। सारंगी के अलावा भाजपा के लोकसभा सदस्य रविशंकर प्रसाद और अनुराग ठाकुर भी समिति का हिस्सा हैं। भाजपा के राज्यसभा सदस्यों में ब्रज लाल और उज्ज्वल निकम भी शामिल हैं।

मानसून सत्र में पेश हुए थे बिल

संविधान संशोधन बिल और दो अन्य प्रस्तावित विधेयक संसद के मानसून सत्र के अंतिम दिन 20 अगस्त को पेश किए गए थे। लोकसभा ने इन तीनों बिलों को संसद की संयुक्त समिति को भेजने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया था। इस संसदीय समिति की नियुक्ति को राजनीतिक दांव-पेंच के शतरंज की बिसात के रूप में देखा जा सकता है, जहां सरकार एक ऐसे विवादास्पद बिल को कानूनी जामा पहनाना चाहती है जिस पर विपक्ष का एक बड़ा हिस्सा आपत्ति जताते हुए खेल से बाहर हो चुका है।

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