Yash Toxic Movie Director: कन्नड़ सिनेमा के सुपरस्टार यश की मोस्ट अवेटिड फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स' रिलीज से पहले ही सुर्खियों में बनी हुई है। बड़े बजट और जबरदस्त एक्शन से सजी इस फिल्म को लेकर प्रशंसकों के बीच भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। हालांकि, फिल्म के बड़ी स्टारकास्ट के बीच जिस एक नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है, वह हैं इसकी डायरेक्टर गीतू मोहनदास। एक लेडी फिल्ममेकर के हाथों में इतने बड़े पैमाने की डार्क और हिंसक गैंगस्टर एक्शन फिल्म की कमान होना इंडस्ट्री के लिए एक नया एक्पिरियंस है। सिनेमा प्रेमी यह जानने को उत्सुक हैं कि आखिर कौन हैं यह मास्टरमाइंड जिन्होंने इस फिल्म की अनोखी दुनिया तैयार की है।
गीतू मोहनदास का असली नाम गायत्री दास है, लेकिन माता-पिता द्वारा प्यार से दिए गए नाम 'गीतू' को ही उन्होंने अपना स्क्रीन नेम बनाया। महज 5 साल की उम्र में गीतू मलयालम सिनेमा में बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट कदम रखा था। दिग्गज एक्टर मोहनलाल की फिल्म 'ओन्नू मुथल पूज्यम वरे' में उनकी मासूम एक्टिंग को दर्शकों ने खूब सराहा। इस पहली ही फिल्म के लिए उन्हें केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट चाइल्ड आर्टिस्ट से सम्मानित किया गया था। इसके बाद गीतू मोहनदास ने कई फेमस साउथ फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
जैसे-जैसे गीतू बड़ी हुईं, उन्होंने मुख्य एक्ट्रेस के रूप में अपनी जर्नी जारी रखी। साल 2000 में फिल्म 'लाइफ इज ब्यूटीफुल' से मुख्य कलाकार के रूप में शुरुआत करने के बाद उन्होंने 'थेनकासी पट्टनम' और 'अकाले' जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया। फिल्म 'अकाले' के लिए उन्हें केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड फॉर बेस्ट एक्ट्रेस और फिल्मफेयर अवॉर्ड साउथ का सम्मान भी मिला। सफलता के बावजूद, उनका दिल कहानियां कहने में बसता था। आखिरकार साल 2009 में अपना प्रोडक्शन हाउस 'अनपलग्ड' शुरू करके उन्होंने डायरेक्शन के क्षेत्र में कदम रखा और एक शॉर्ट फिल्म बनाई।
गीतू मोहनदास का डायरेक्टर के रूप में असली कमाल फिल्म 'लायर्स डाइस' से सामने आया। सामाजिक और राजनीतिक संदर्भों पर आधारित इस छोटे बजट की स्वतंत्र फिल्म ने अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल सर्किट में खूब धूम मचाई। फिल्म ने 2 नेशनल अवॉर्ड जीते और इसे 87वें ऑस्कर अवॉर्ड्स में भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में भेजा गया था।
इसके बाद उन्होंने निविन पॉली स्टारर 'मूथोन' बनाई, जिसे टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में काफी सराहा गया। अब 'टॉक्सिक' के जरिए वह अपनी संवेदनशील सिनेमाई शैली को एक बड़े कमर्शियल और मासी कैनवास पर उतारने के लिए तैयार हैं।