विनोद खन्ना संन्यास स्टोरी (सौ. सोशल मीडिया)
मनोरंजन

अगर ओशो के पास न जाते तो अमिताभ से आगे होते विनोद खन्ना, इसलिए फिल्मी दुनिया छोड़ माली बनने का किया फैसला

Vinod Khanna ने करियर की बुलंदी पर साल 1982 में बॉलीवुड छोड़कर संन्यास का ऐलान कर दिया था। परिवार में हुई चार मौतों के सदमे के बीच उन्होंने आध्यात्मिक शांति के लिए ओशो का आश्रम चुना।

अपूर्वा नायक

Vinod Khanna Birthday Special: अमर अकबर एंटनी, मुकद्दर का सिकंदर और चांदनी जैसी सुपरहिट फिल्मों में अपनी दमदार एक्टिंक का जलवा बिरेखने वाले विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को हुआ था। आज विनोद खन्ना की 80वीं जयंती मनायी जा रही है।

अपनी एक्टिंग से लोगों का दिल जीतने वाले इस अभिनेता के जीवन में एक ऐसा मुश्किल समय भी आया था, जिसने उन्हें बुरी तरह से तोड़ दिया था। ये गम इतना बड़ा था कि अपने करियर की पीक पर होते हुए भी विनोद खन्ना ने फिल्म इंडस्ट्री को छोड़कर आध्यात्म की ओर बढ़ने का फैसला लिया था।

विनोद खन्ना ने किया था संन्यास का ऐलान

विनोद खन्ना एक ऐसे एक्टर थे, जिन्होंने अपने करियर के पीक के समय एक ऐसा ऐतिहासिक फैसला लिया था, जिसने सभी को सन्न कर दिया था। साल 1982 में उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर बॉलीवुड को अलविदा कह दिया था और संन्यास लेने का निर्णय लिया था। ये फैसला उन्होंने ऐसे समय पर लिया था, जब उनकी टक्कर सीधे अमिताभ बच्चन से होती थी।

आखिर क्यों लिया था संन्यास?

बेइंतहा दौलत, शौहरत और कामयाबी के बाद भी विनोद खन्ना के जीवन में एक ऐसा अधूरापन था, जिसे कोई नहीं भर सकता था। साल 1975 के आस-पास ही महज 6 से 7 महीनों के अंदर ही विनोद खन्ना ने अपनी मां, बहन समेत अपने परिवार के 4 सदस्यों को खो दिया था। ये दर्द विनोद खन्ना के लिए काफी मुश्किल था, इसीलिए अपनी जिंदगी में मानसिक शांति हासिल करने के लिए विनोद खन्ना ने संन्यास लेने का फैसला लिया था।

विनोद खन्ना पहले से ही आध्यात्मिक गुरु ओशो यानी श्री रजनीश के विचारों से काफी प्रभावित थे। शुरुआती समय में वीकेंड पर ओशो के पुणे आश्रम में समय बिताने वाले एक्टर विनोद खन्ना ने साल 1982 में सब कुछ छोड़कर ओशो के साथ अमेरिका में स्थित रजनीशपुरम आश्रम जाने का फैसला लिया था। ओशो ने उन्हें स्वामी विनोद भारती के नाम से नई पहचान दी थी।

ओशो के आश्रम में किया माली का काम

बॉलीवुड में अपने नाम की शौहरत हासिल करने वाले विनोद खन्ना ने ओशो के आश्रम पहुंचकर बिल्कुल सादा जीवन जीने का फैसला ले लिया था। विनोद खन्ना ने ओशो के पर्सनल गार्डन में बतौर माली यानी गार्डनर भी काम किया। इतना ही नहीं वो आश्रम में झूठे बर्तन धोने और टॉयलेट साफ करने जैसा भी काम कर चुके थे। भगवा चोले और माला में विनोद खन्ना के हैंडसम लुक के कारण मीडिया ने उन्हें सेक्सी संन्यासी का भी नाम दे दिया था।

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