फिल्म टॉक्सिक (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
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Toxic Movie Review: यश का खौफनाक डबल रोल और गीतू मोहनदास का विजन, बड़े पर्दे पर शानदार एक्शन का धमाकेदार डोज

Yash Toxic Movie Review: सुपरस्टार यश की फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। 3 साल के लंबे इंतजार के बाद यश ने बड़े पर्दे पर धमाकेदार वापसी की है।

यति सिंह

Toxic First Day First Show: सुपरस्टार यश की फिल्म 'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' आखिरकार सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। तीन साल के लंबे इंतजार के बाद जब रॉकिंग स्टार यश बड़े पर्दे पर लौटते हैं, तो सिर्फ धमाका नहीं करते बल्कि पूरे थिएटर को हिलाकर रख देते हैं। प्रतिभावान निर्देशक गीतू मोहनदास के कुशल निर्देशन में बनी इस भव्य फिल्म का निर्माण मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस और केवीएन प्रोडक्शंस के बैनर तले खुद यश और वेंकट के. नारायण द्वारा किया गया है।

यह सिर्फ एक आम एक्शन फिल्म नहीं है, बल्कि पावर, बगावत, खतरनाक अंडरवर्ल्ड और गहरे जज्बातों का ऐसा बवंडर है जो आपको पहले फ्रेम से आखिरी सेकंड तक सीट से बांधे रखता है। नवभारत इस फिल्म को 3.5 स्टार्स देता है और इसकी वजह जानने के लिए पढ़ें फिल्म का ये स्पेशल रिव्यू।

कहानी और क्लाइमैक्स

‘टॉक्सिक’ को सिर्फ एक साधारण एक्शन ड्रामा कहना इसके साथ नाइंसाफी होगी। यह फिल्म दर्शकों को अपराध और ताकत के एक ऐसे अंधेरे साम्राज्य में ले जाती है, जहां गोलियों की गूंज के साथ-साथ प्यार, वफादारी और परिवार की एक संवेदनशील जंग चलती है। कहानी की शुरुआत होती है खतरनाक गैंगस्टर राया से, जिसके लिए वफादारी ही सब कुछ है। लेकिन जब उसके बेटे टिकट की एंट्री होती है, तो कहानी एक भावुक मोड़ ले लेती है।

राया की जिंदगी से जुड़े कई अनकहे राज, अतीत के पन्ने और रिश्तों की उलझनें सामने आती हैं। फिल्म में नादिया और गंगा जैसे किरदार कहानी को एक मजबूत भावनात्मक रीढ़ देते हैं। जैसे-जैसे सेकंड हाफ आगे बढ़ता है, यह लड़ाई और ज्यादा हिंसक व असल हो जाती है। जब आपको लगता है कि आपने पूरी कहानी भांप ली है, तभी क्लाइमैक्स एक ऐसा अनपेक्षित और अप्रत्याशित मोड़ लेता है जो थिएटर से बाहर आने के बाद भी आपके दिमाग में घूमता रहता है।

अभिनय

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत सुपरस्टार यश का स्क्रीन-प्रेजेंस से भरा दोहरा किरदार है। यश ने यहाँ दो अलग-अलग पीढ़ियों को दो अलग तेवरों के साथ जिया है। 'राया' के किरदार में उनका ऐसा खौफनाक ठहराव है कि बिना बोले सिर्फ उनकी आंखों से दहशत पैदा होती है। वहीं उनके बेटे 'टिकट' के रूप में यश एक बेकाबू, खतरनाक और हाई-एनर्जी तूफान बनकर आते हैं, जो हर मल्टीप्लेक्स में सीटियां बजाने पर मजबूर कर देता है। दोनों किरदारों की बॉडी लैंग्वेज और स्टाइल में यश का यह फर्क काबिले तारीफ है।

सपोर्टिंग कास्ट में भी हर किरदार कहानी की धड़कन बना है। नयनतारा (गंगा) ने पूरे ड्रामे को एक मजबूत इमोशनल आधार दिया है, वहीं कियारा आडवाणी (नादिया) प्यार और मासूमियत लेकर आती हैं। हुमा कुरैशी (एलिजाबेथ) अपनी ठसक से छा जाती हैं, जबकि रुक्मिणी वसंत (मेलिसा) अपने सादगी भरे अंदाज से दिल जीत लेती हैं। इसके अलावा तारा सुतारिया, अक्षय ओबेरॉय, डैरेल डी'सिल्वा और सुदेव नायर ने भी इस अंडरवर्ल्ड को बेहद असल और खूंखार बना दिया है।

निर्देशन, एक्शन और संगीत

निर्देशक गीतू मोहनदास ने साबित कर दिया है कि बड़े कैनवास की मास-एक्शन फिल्मों में भी भावनात्मक गहराई और बेहतरीन स्टोरीटेलिंग को कैसे पिरोया जाता है। पहला हाफ किसी शतरंज के खेल जैसा है, जहां जल्दबाजी न करते हुए सत्ता और वफादारी के मोहरे सजाए जाते हैं। फिर आता है इंटरवल ब्लॉक, एक ऐसा सीक्वेंस जो दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देता है।

इसके बाद सेकंड हाफ में फिल्म सीधा पांचवें गियर में दौड़ती है, जहां एक्शन का स्केल और ज्यादा विशाल, रॉ और वाइल्ड हो जाता है। फिल्म का बैकग्राउंड संगीत साउंड सिस्टम को कंपा देने वाले असर के साथ एक्टर यश का हर एक्शन सीन में रोंगटे खड़े कर देता है, जो 3 घंटे 14 मिनट के इस सफर में दर्शकों की उत्सुकता लगातार बनाए रखता है।

अंतिम फैसला

'टॉक्सिक: ए फेयरीटेल फॉर ग्रोन-अप्स' उन बेहद दुर्लभ फिल्मों में से है, जहां जबरदस्त सीटीमार मास मोमेंट्स भी मिलते हैं और दिल को झकझोर देने वाली गहरी कहानी भी। यश का जलवा, गैंगस्टर वर्ल्ड का रियलिस्टिक थ्रिल और गीतू मोहनदास का भव्य विजन इसे एक अनछुआ थिएट्रिकल अनुभव बनाते हैं।

अगर आप सिनेमाघरों में एक ऐसा भव्य सिनेमाई अनुभव देखना चाहते हैं जो खत्म होने के बाद भी आपके दिमाग से न उतरे, तो पॉपकॉर्न का बड़ा टब उठाकर आप इसे IMAX या किसी अन्य बड़े पर्दे पर देख सकते हैं क्योंकि यह फिल्म सिर्फ और सिर्फ सिनेमाघरों के लिए बनी है!

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